पढ़े-लिखे अफसर और प्रोफेसर पर…आस्था को शर्मसार करने का आरोप…नाली के पानी में गणपति विसर्जन… ग्रीन पैराडाइज में बवाल…

रायपुर। जिस गजानन को प्रथम पूज्य कहा जाता है, जिनके बिना कोई भी मांगलिक कार्य शुरू नहीं होता, उन्हीं विघ्नहर्ता के साथ राजधानी की एक VIP कॉलोनी में ऐसा सलूक किया गया जिसने सनातन आस्था पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला विशाल नगर स्थित प्रतिष्ठित कॉलोनी ‘ग्रीन पैराडाइज’ का है।
टंकी में प्रतिमा विसर्जित :-
बताया जा रहा है कि जहां पूरे रायपुर में मूसलाधार बारिश के बीच भी श्रद्धालु 3-4 दिन तक बाजे-गाजे के साथ पवित्र जलाशयों में बप्पा का विसर्जन कर रहे थे, वहीं ग्रीन पैराडाइज की पूजा कमेटी ने आनन-फानन में कॉलोनी के अंदर बनी एक जर्जर, सड़ांध और कचरा भरी टंकी में प्रतिमा विसर्जित कर दी, जिसका पानी सीधे नाली में जाता है।
सोशल मीडिया ग्रुप में मैसेज ;-
रहवासियों का आरोप है कि इस कृत्य को छिपाने के लिए कॉलोनी के आधिकारिक सोशल मीडिया ग्रुप में मैसेज डाला गया कि “विसर्जन पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से संपन्न हुआ।”
विरोध पर दूसरी बड़ी गलती का आरोप :-
जब धर्मप्रेमी रहवासियों को सच्चाई का पता चला तो आक्रोश फूट पड़ा। रहवासियों ने जब कमेटी से सवाल किया तो जवाब मिला – “बारिश हो रही थी।”
रहवासियों का तर्क था कि शास्त्रों में भी विधान है कि यदि मौसम प्रतिकूल हो तो विसर्जन एक दिन आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि जिम्मेदार लोग प्रायश्चित पूजा कर सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें।
आरोप है कि माफी मांगने के बजाय साक्ष्य मिटाने के लिए कॉलोनी के सुरक्षा गार्ड के जरिए उसी प्रतिमा को तुड़वाकर, खंडित कर एक झोले में भरकर अज्ञात जगह पर फिंकवा दिया गया। शास्त्रों में जानबूझकर विग्रह खंडित करना महापाप माना गया है।
तथाकथित प्रबुद्ध वर्ग पर उठे सवाल :-
सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में आरोप किसी अनपढ़ व्यक्ति पर नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले पढ़े-लिखे लोगों पर लग रहे हैं। रहवासियों के अनुसार इस पूरी घटना में शासकीय सेवक अविनाश चौरसिया, सपना चौरसिया, भूमिका धर्मेश शाह और कमेटी के शीर्ष पद पर आसीन कॉलेज प्रोफेसर पूनम उर्फ संजू साहू की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
कॉलोनी के लोगों का पूछना है कि एक तरफ युवा पीढ़ी को संस्कार सिखाने वाले प्राध्यापक और कानून-व्यवस्था का प्रतीक कहे जाने वाले अधिकारी, ऐसे कृत्य पर चुप कैसे रह सकते हैं?
वहीं, अब कमेटी के कुछ बुजुर्ग सदस्य मामले को यह कहकर दबाने की कोशिश कर रहे हैं कि “जो हो गया सो हो गया, बात पर पानी डालो।”
फिलहाल ग्रीन पैराडाइज के रहवासियों में भारी आक्रोश है। रहवासी सार्वजनिक पश्चाताप, वैदिक विधि से प्रायश्चित अनुष्ठान और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े हुए है ।




