हाईकोर्ट सख्त: नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती नहीं… चिकित्सा शिक्षा सचिव अमित कटारिया को अवमानना नोटिस…
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के 2023 के फैसले का 3 साल बाद भी पालन नहीं…100% महिला आरक्षण को बताया था असंवैधानिक

रायपुर/बिलासपुर। शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक के पदों पर नियमित भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव आईएएस अमित कटारिया को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मामले की सुनवाई 23 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकल पीठ में हुई।
यह अवमानना याचिका नर्सिंग ऑफिसर यूनियन के अध्यक्ष डॉ. अजय त्रिपाठी, अभय किस्पोट्टा, एलयूश खलको एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता नेल्सन पन्ना, आशुतोष मिश्रा और रूपेश साहू ने दायर की है।
क्या है पूरा मामला ?
मामला वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने WPS क्रमांक 7187/2021 एवं अन्य संबंधित याचिकाओं में छत्तीसगढ़ मेडिकल एजुकेशन राजपत्रित सेवा भर्ती नियम 2013 के अनुसूची-3 के नोट-2 तथा 8 दिसंबर 2021 के भर्ती विज्ञापन के क्लॉज-5 को चुनौती दी थी।
9 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इन प्रावधानों को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में सीधी भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है।
CGPSC ने खुद लिखा था पत्र, फिर भी विभाग सोता रहा:-
याचिका में बड़ा खुलासा किया गया है। हाईकोर्ट के फैसले के महज 6 दिन बाद ही 15 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर हाईकोर्ट के निर्णय की जानकारी दी थी और निर्णय के अनुसार संशोधित अधियाचन भेजने का अनुरोध किया था, ताकि नियमित भर्ती आगे बढ़ सके।
आरोप है कि विभाग ने न तो भर्ती नियमों में संशोधन किया और न ही संशोधित अधियाचन आयोग को भेजा। जिसके कारण पिछले 3 साल से नियमित भर्ती अटकी पड़ी है।
नियमित की जगह संविदा भर्ती का खेल :-
याचिकाकर्ता डॉ. अजय त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के फैसले का पालन करने के बजाय विभाग ने 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। इस विज्ञापन को भी त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता अभय किस्पोट्टा का कहना है कि रिट याचिका की सुनवाई के दौरान स्वयं राज्य सरकार ने 15 मार्च 2023 के CGPSC पत्र का उल्लेख किया था, जिससे साफ है कि विभाग को हाईकोर्ट के आदेश की पूरी जानकारी थी।
याचिकाकर्ताओं ने इसे हाईकोर्ट के बाध्यकारी आदेश की जानबूझकर और सुविचारित अवज्ञा बताते हुए सचिव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग की है। अब सचिव की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।



