जशपुर से रायपुर तक जिंदगी की उड़ान…चिरायु ने पकड़ा…हर सांस थी जंग… बिना चीर-फाड़ के…8 साल की बेटी को मिली नई सांसें!

रायपुर, 09 सितंबर। जशपुर जिले के सुदूर गांव जैकुदर की 8 वर्षीय स्वर्णि बाई के लिए अब सांस लेना बोझ नहीं है। कभी मामूली खेलने पर भी सांस फूल जाती थी, दिल जोर-जोर से धड़कता था और बार-बार छाती में संक्रमण हो जाता था। जांच में वजह सामने आई तो परिवार के होश उड़ गए – मासूम के दिल में जन्म से ही छेद था। लेकिन समय पर पहचान और रायपुर में हुए अत्याधुनिक इलाज ने उसे नई जिंदगी दे दी है।
बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम :-
दुलदुला विकासखंड के जैकुदर प्राथमिक शाला में पढ़ने वाली स्वर्णि लंबे समय से बीमार रहती थी। गांव में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चिरायु दल की टीम ने स्कूल में स्वास्थ्य जांच की, तो हृदय रोग की आशंका हुई।
5.4 मिमी का बड़ा छेद :-
तत्काल उसे रायपुर रेफर किया गया, जहां इको जांच में Large Type-A PDA (Patent Ductus Arteriosus) की पुष्टि हुई। उसके दिल में 5.4 मिमी का बड़ा छेद था, जिससे खून का प्रवाह असामान्य हो रहा था और दिल पर लगातार दबाव बन रहा था। निजी अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञों ने बड़ी राहत देते हुए ओपन हार्ट सर्जरी की जगह बिना चीरा वाली तकनीक अपनाने का फैसला लिया।
बिना ओपन हार्ट सर्जरी :-
डॉक्टरों ने कैथेटर के जरिए 8/10 mm Lifetech Heart R PDA Occluder डिवाइस से उसके दिल के छेद को सफलतापूर्वक बंद कर दिया। पूरी प्रक्रिया के बाद जांच में डिवाइस अपनी सही जगह पर पाया गया, कहीं कोई लीकेज या रेजिडुअल शंट नहीं मिला और हृदय की कार्यक्षमता बिल्कुल सामान्य हो गई। स्थिति संतोषजनक होने पर स्वर्णि को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और जल्द ही अपने स्कूल लौटेगी।
सिर्फ इलाज नहीं, एक संदेश :-
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में बार-बार सर्दी-खांसी, छाती में संक्रमण, जल्दी थक जाना, सांस फूलना और तेज धड़कन जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर स्क्रीनिंग ही जन्मजात हृदय रोग से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।




