शिक्षा विभाग के अफसरों ने हाईकोर्ट के आदेश छिपाए, लोक आयोग में शिकायत

रायपुर, 24 जुलाई l प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर हाईकोर्ट के आदेशों को छिपाकर छत्तीसगढ़ लोक आयोग को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता एवं छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में लंबित जनहित याचिका WPPIL No. 22/2016 के इंटरवेनर विकास तिवारी ने आज लोक आयोग में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई ।
जानबुझकर यह तथ्य छिपाया :-
शिकायत में कहा गया है कि लोक आयोग में चल रहे प्रकरण क्रमांक 34/2024 के निराकरण के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जानबूझकर यह तथ्य छिपाया कि इसी विषय पर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लंबित है और उसमें महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश पारित हो चुके हैं।
न्यायालय ने यह भी दर्ज किया :-
विकास तिवारी ने शिकायत में हाईकोर्ट के 11.07.2025, 05.08.2025, 17.09.2025 और 20.07.2026 के आदेशों का हवाला दिया है। शिकायत के अनुसार, 20 जुलाई 2026 के आदेश में न्यायालय ने यह भी दर्ज किया है कि इंटरवेनर विकास तिवारी ने न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया कि RTE Act, 2009 की धारा 18 के बावजूद राज्य में बिना पंजीयन / बिना मान्यता के सैकड़ों स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसी सुनवाई के दौरान लोक आयोग के 30.06.2026 के आदेश का भी उल्लेख न्यायालय के समक्ष किया गया था।
आदेशों का पालन नहीं :-
शिकायतकर्ता का आरोप है कि माननीय उच्च न्यायालय पिछले 15 वर्षों से प्रदेश में संचालित अवैध / बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कड़ी टिप्पणी कर चुका है और उनके खिलाफ कार्रवाई के स्पष्ट आदेश जारी किए हैं, बावजूद इसके शिक्षा विभाग द्वारा उन आदेशों का पालन नहीं किया गया।
बिना मान्यता संचालित स्कूलों को संरक्षण :-
इस पूरे मामले में सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, उप सचिव, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जांच की मांग की गई है। शिकायत में मांग की गई है कि जांच की जाए कि क्या लोक आयोग के समक्ष अपूर्ण और भ्रामक प्रतिवेदन प्रस्तुत कर बिना मान्यता संचालित स्कूलों को संरक्षण दिया जा रहा है।
आदेशों का परीक्षण :–
शिकायतकर्ता ने लोक आयोग से मांग की है कि उच्च न्यायालय के सभी संबंधित आदेशों का परीक्षण कर, यदि तथ्यों को जानबूझकर छिपाया जाना सिद्ध होता है, तो दोषी अधिकारियों के विरुद्ध प्रचलित कानून एवं सेवा नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।



