छत्तीसगढ़

उमड़ा आस्था का सैलाब…गीता ज्ञान अमृत वर्षा में गूंजा…जीवन को दिशा देता है गीता का ज्ञान…

रायपुर, 27 अक्टूबर। माँ कामाख्या धर्मादा ट्रस्ट भारत वर्ष के संयोजन में आयोजित त्रिदिवसीय गीता ज्ञान अमृत वर्षा का शुभारंभ आज भव्य रूप से हुआ। प्रथम दिवस पर गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी महाराज के मुखारविंद से गीता कथा का अमृतपान करने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। पूरा पंडाल “जय श्री कृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।

अहंकार ही ईश्वर से दूरी का कारण:-

गुरुदेव ने कहा कि जितने भी हमारे धर्म, ग्रंथ और शास्त्र हैं, वे सभी भगवान श्रीकृष्ण के ही आदेश हैं। उन्होंने कहा कि आडंबर, अहंकार, क्रोध, लोभ और लालच जैसी कुप्रवृत्तियां मनुष्य को ईश्वर से दूर ले जाती हैं। व्यक्ति सही दिशा में चलना नहीं चाहता और गलत राह को छोड़ने के लिए तैयार नहीं होता, यही उसे पथभ्रष्ट कर देती है।

भीष्म पितामह भ्रम के प्रतीक हैं:-

गुरुदेव ने महाभारत के प्रसंग से समझाते हुए कहा कि भीष्म पितामह भ्रम के प्रतीक हैं। वे हर परिस्थिति में अपनी ही परिभाषा गढ़कर खुद को सही सिद्ध करने में लगे रहे। मोह-माया के कारण वे निष्पक्ष निर्णय नहीं ले पाए और एक के बाद एक गलतियां दोहराते गए।

हमारे भीतर ही बैठे हैं कौरव:-

गुरुदेव ने कहा कि जीवन के महाभारत पर विजय पाने के लिए अपने भीतर के कौरवों को त्यागना आवश्यक है। हमारे भीतर ही लोभ रूपी दुर्योधन, वासना रूपी दुशासन, भ्रम रूपी भीष्म और द्वंद्व रूपी द्रोणाचार्य शासन करते हैं। जब तक इन कुप्रवृत्तियों का त्याग कर सद्गुणों को नहीं अपनाएंगे, तब तक भगवान की कृपा फलीभूत नहीं होगी।

जीवन को दिशा देते हैं प्रकृति के तीन गुण:-

उन्होंने कहा कि जीवन असंतुलित इसलिए होता है क्योंकि व्यक्ति प्रकृति के तीन गुणों – तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण में संतुलन नहीं रख पाता। गुरु रूपी ज्ञान-ज्योति के सान्निध्य में ही व्यक्ति इन तीनों गुणों में संतुलन स्थापित करना सीखता है और जीवन सही दिशा में आगे बढ़ता है। जैसे अर्जुन ने श्रीकृष्ण के उपदेश से कर्तव्य पालन किया, वैसे ही हमें गुरु के मार्गदर्शन में जीवन जीना चाहिए।

कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर गीता ज्ञान का लाभ लेते रहे। अंत में आरती के पश्चात ट्रस्ट द्वारा आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में वासुदेव मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य परामर्श दिया।

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