विकास का पैसा, ऑफिस के शौक में स्वाहा! कागज पर 100% काम पूरा…जमीन पर 188 करोड़ के प्रोजेक्ट अधूरे…स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने माना…प्रोजेक्ट फंड से उड़ाए 1.82 करोड़…

रायपुर 24 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार मोर्चा खोलने वाले श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य एवं कांग्रेस नेता अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर एक बार फिर सरकार की नींद उड़ाने वाले दस्तावेजी प्रमाण लेकर सामने आए हैं।
राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) में चल रही 1764 करोड़ के रायपुर-बिलासपुर स्मार्ट सिटी घोटाले की जांच के बीच, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), नई दिल्ली से 12 अक्टूबर 2026 को प्राप्त RTI ने अधिकारियों के झूठ की पूरी पोल खोल दी है।
हवा-हवाई आरोप नहीं :-
मनोज ठाकुर ने साफ कहा – “मेरा लेखा-जोखा कोई हाथ से लिखा पर्चा या हवा-हवाई आरोप नहीं है। ये भारत सरकार के नियमों के तहत RTI से निकले सरकारी दस्तावेज हैं, जो चीख-चीख कर कह रहे हैं कि घोटाला हुआ है।”
सरकार को बेनकाब करते हैं: –
1. लिखित में कबूला फंड डायवर्जन – सीधा वित्तीय अपराध
RTI रिपोर्ट के पेज-8 पर रायपुर स्मार्ट सिटी के आधिकारिक पत्र क्रमांक 25153 में साफ लिखा है – “A&OE (ऑफिस खर्च) का बजट कम पड़ गया तो प्रोजेक्ट फंड से 1,82,50,000 उधार लेकर खर्च कर दिया।” यानी जनता के विकास के पैसे से अफसरों ने अपने ऑफिस के शौक पूरे किए।
2. कागज पर खेल, जमीन पर धोखा:-
केंद्र की Annexure-II रिपोर्ट कहती है – स्मार्ट सिटी मिशन 31 मार्च 2025 को खत्म हो चुका है और खातों में 100% खर्च दिखाकर NIL बैलेंस कर दिया गया है। जबकि धरातल की सच्चाई यह है कि रायपुर के 3 प्रोजेक्ट (27 करोड़) और बिलासपुर के 8 प्रोजेक्ट (161 करोड़) आज भी Implementation Stage पर अधूरे लटके हैं।
3. छत्तीसगढ़ को 98 करोड़ का चूना:-
हर स्मार्ट सिटी को केंद्र से 490 करोड़ मिलना था। इंदौर, जबलपुर, नागपुर, भुवनेश्वर ने पूरे 490-490 करोड़ लिए। लेकिन रायपुर-बिलासपुर के अधिकारियों की नाकामी से रायपुर को सिर्फ 453 करोड़ (37 करोड़ का नुकसान) और बिलासपुर को सिर्फ 429 करोड़ (61 करोड़ का नुकसान) ही मिल पाया। कुल मिलाकर प्रदेश को 98 करोड़ के केंद्रीय अनुदान से हाथ धोना पड़ा।
सरकार पर हमला:-
ठाकुर ने कहा कि आज पूरे प्रदेश में आम जनता का एक भी काम नहीं हो रहा है। नलों में पानी नहीं, सड़कों पर धूल, सफाई के नाम पर कागजी खानापूर्ति है। सरकार सिर्फ चुनावी घोषणाओं और मुफ्त की योजनाओं पर चल रही है, धरातल पर कोई विकास नहीं। आम जनता त्रस्त है और सरकार मस्त है, नेताओं-अफसरों के ऐशो-आराम पूरे चल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रायपुर स्मार्ट सिटी से लेकर महतारी वंदन योजना तक हर विभाग का हिसाब उनके पास है और इन अकाट्य सरकारी दस्तावेजों को EOW को सौंपा जा रहा है। अब इस घोटाले की परतें और तेजी से खुलेंगी।




