छत्तीसगढ़

मंडी बोर्ड में 45% कमीशन का खेल! 16 साल से कुर्सी पर जमे MD सवन्नी पर बवाल…भूपेश बघेल ने CM साय को लिखा पत्र …बोले, तुरंत बर्खास्त करो…

रायपुर 28 सितंबर ।  छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालक (MD) महेंद्र सिंह सवन्नी का मामला अब सिर्फ विभागीय नहीं, बल्कि प्रदेश की सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। बोर्ड के पीड़ित अधिकारियों-कर्मचारियों की आवाज बनकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर मोर्चा खोल दिया है, तो वहीं कांग्रेस के कद्दावर नेता एवं पूर्व श्रम कल्याण मंडल अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल ने भी सरकार को सीधे घेरा है।

भूपेश बघेल का सीएम  को कड़ा पत्र – “ये GAD नियमों की हत्या है” :-

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने पत्र में सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने लिखा कि मंडी बोर्ड के दर्जनों पीड़ित अधिकारी-कर्मचारियों ने उनसे मिलकर आपबीती सुनाई है। बघेल ने आरोप लगाया कि 2005 की डीपीसी में सवन्नी को योग्यता सूची में 14वें नंबर पर रखा गया था, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर अपील के जरिए उन्हें नंबर-1 पर लाया गया। 2005 से 2007 के बीच नियम विरुद्ध तरीके से 4-4 पदोन्नतियां – सहायक संचालक से सीधे उप संचालक, संयुक्त संचालक और अपर संचालक तक हथिया ली गईं।

सबसे बड़ा सवाल:-

पिछले 16 साल से एक ही व्यक्ति रायपुर मुख्यालय में कैसे जमा है? जून 2024 में रिटायरमेंट के बाद भी 5वीं बार संविदा विस्तार देकर उन्हें कुर्सी पर बनाए रखना सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के नियमों की धज्जियां उड़ाना है।

45% कमीशन के खेल की हो जांच :-

पूर्व CM ने पत्र में सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मंडी बोर्ड में 45 प्रतिशत कमीशन/हिस्सेदारी का खेल जगजाहिर है, जो पहले भी मीडिया की सुर्खियां बन चुका है। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी ही चाहिए।

सवन्नी की तानाशाही :-

उन्होंने यह भी बताया कि कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रांत अध्यक्ष डॉ. मलिक राम पोर्ते और अपर संचालक कमलेश इक्का सहित कई कर्मचारियों ने सवन्नी की तानाशाही और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ राखी थाने में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है। बोर्ड के कर्मचारी आज भय के माहौल में काम करने को मजबूर हैं।

सुशील सन्नी अग्रवाल की चेतावनी – दिल्ली तक जाएगी लड़ाई :-

कांग्रेस नेता सुशील सन्नी अग्रवाल ने कहा, “मंडी बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी आज दहशत में हैं। एक रिटायर्ड अधिकारी को 5 बार एक्सटेंशन देना युवाओं के भविष्य के साथ धोखा है। यह सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।” उन्होंने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 15 दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो वे पीड़ित कर्मचारियों के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने का समर्थन करेंगे और इस लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाएंगे।

दोनों नेताओं की दो सूत्रीय मांग:-

1.   महेंद्र सिंह सवन्नी की वर्तमान संविदा नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

2.   2005-2007 के बीच हुई नियम विरुद्ध पदोन्नतियों, 16 साल के एक ही जगह कार्यकाल और 45% कमीशन के आरोपों की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

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