शहर में कॉरपोरेट को छूट…गांव में गरीब पर हंटर…भाजपा का दोहरा चरित्र: विनोद चंद्राकर

महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने गांवों को वसूली का टोल प्लाजा बना दिया है और पंचायती राज व्यवस्था को ध्वस्त करने पर तुली है।
चंद्राकर ने कहा कि महासमुंद सहित पूरे छत्तीसगढ़ की पंचायतों को केंद्र से फरमान आया है कि हर ग्रामीण परिवार से सालाना 1200 रुपये तक प्रकाश कर, सफाई कर जैसे स्थानीय कर वसूले जाएं। टैक्स नहीं वसूलने पर परफॉर्मेंस ग्रांट और विकास फंड में कटौती की धमकी दी जा रही है।
उन्होंने कहा, “12 साल में किसान को सिर्फ नारे मिले। खाद-डीजल महंगा, मनरेगा का बजट घटा, अब पंचायतों से कहा जा रहा है अपने पैरों पर खड़े हो। जब कमर ही तोड़ दी तो खड़ी कैसे होंगी? यह परफॉर्मेंस ग्रांट के नाम पर ब्लैकमेल है।”
चंद्राकर ने सवाल उठाया कि 1200 रुपये वह परिवार कैसे देगा जिसके घर चूल्हा जलना मुश्किल है? क्या वह किसान देगा जिसकी फसल औने-पौने दाम पर बिकती है, या वह विधवा जिसकी पेंशन महीनों से नहीं आई? यह टैक्स नहीं, गरीब की थाली से निवाला छीनने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ शहरों में कॉरपोरेट मित्रों के हजारों करोड़ माफ किए जाते हैं, दूसरी तरफ गांव के गरीब से 100 रुपये महीना मांगा जा रहा है। गांव कोई राजस्व मशीन नहीं, देश की संस्कृति और रीढ़ है। एसी कमरों में बैठकर नीति बनाने वालों को गांव के दर्द का अंदाजा नहीं है



