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बैंक की ‘लेडी अफसर’ का दर्द…कहा “मुझे मार डालेंगे…मेरे मर्डर के जिम्मेदार CEO होंगे… सहकारी बैंक की महिला अफसर ने …कलेक्टर को लिखा पत्र! मेरी सांसें टूट रही हैं”

अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सहकारी बैंकों में से एक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित अम्बिकापुर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ प्रधान कार्यालय में 37 सालों से कार्यरत महिला अधिकारी ने बैंक के ही एक कर्मचारी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी पर मानसिक प्रताड़ना, गाली-गलौज और जान से खतरे का आरोप लगाया है।

कलेक्टर को लिखित शिकायत:-

पीड़िता श्रीमती निर्मला तिवारी, सहायक मुख्य पर्यवेक्षक, स्थापना शिकायत कक्ष ने 16.09.2026 को कलेक्टर सरगुजा को लिखित शिकायत सौंपी है। जिसकी प्रतिलिपि उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक, महिला थाना सहित 9 बड़े अधिकारियों को भेजी है।

पत्र  पढ़कर चौंक जाएंगे,  निर्मला का आरोप :-

1. एक साल से टारगेट:-

बैंक में कार्यरत कर्मचारी अजीत सिंह पिछले एक साल से उनके खिलाफ झूठी शिकायतें कर रहा है और गाली-गलौज कर प्रताड़ित कर रहा है।

2. करोड़ों का गबन केस:-

अजीत सिंह के खिलाफ बैंक में करोड़ों रुपये के गबन का प्रकरण लंबित है, जिसे वो नष्ट करवाना चाहता है।

3. CEO के चेंबर में टॉर्चर:-

सबसे बड़ा आरोप बैंक के CEO श्रीकांत चन्द्राकर पर है। आरोप है कि CEO अपने कक्ष में बुलाकर अजीत सिंह के सामने ही उन्हें अत्यधिक टॉर्चर करते हैं। इसकी लिखित शिकायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तक को दी गई, पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

4. बिना जांच के नोटिस:-

अजीत सिंह की झूठी शिकायत पर CEO बिना जांच-पड़ताल के उन्हें नोटिस जारी कर देते हैं।

5. सुबह 10 से रात 8 बजे तक काम, फिर भी प्रताड़ना:

  1. लगातार सुबह 10 से रात 8 बजे तक काम और मानसिक प्रताड़ना से उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बिगड़ गई।

छुट्टी मांगी तो वेतन काट दिया!

स्वास्थ्य बिगड़ने पर निर्मला ने 24.08.2026 से अवकाश का आवेदन दिया और घर पर स्वास्थ्य लाभ लेना चाहा। आरोप है कि CEO ने आज तक अवकाश स्वीकृत नहीं किया, उल्टा 24 अगस्त से उनका वेतन काट दिया गया। इतना ही नहीं, अवकाश अवधि में भी बैंक द्वारा उनके घर नोटिस भिजवाया जा रहा है और अजीत सिंह दूसरों के नाम से शिकायत करवा कर परेशान कर रहा है।

पत्र के अंत में भावुक और डरावनी बात :-

मुझे अपने जान का खतरा बना है, क्योंकि लगातार मेरा स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा है। यदि मुझे न्याय नहीं मिला और मेरे साथ कोई अनहोनी घटना घटती है तो इसके लिये अजीत सिंह एवं श्री श्रीकांत चन्द्राकर पूर्ण रूप से जवाबदार होंगे।”

उन्होंने अपने दावे के समर्थन में 2018 से लेकर 2026 तक के 8 दस्तावेजों की छायाप्रति भी लगाई है।
अब देखना होगा कि कलेक्टर और महिला आयोग इस 37 साल पुरानी महिला कर्मचारी की गुहार पर क्या कार्यवाही करते हैं।

 

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