कैशलेस का ढोल…जेब पर हथौड़ा… UPI भुगतान पर शुल्क…केंद्र पर बरसे पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर…

महासमुंद। केंद्र की मोदी सरकार जनता को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही आम जनता पर अब एक नया आर्थिक हमला किया गया है। पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने केंद्र सरकार के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए यह बात कही है।
300 रुपये तक वसूला जाएगा :-
चंद्राकर ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर 4.0 प्रतिशत शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। 75 हजार से अधिक के भुगतान पर यह शुल्क 300 रुपये तक वसूला जाएगा। यह फैसला पूरी तरह से जनविरोधी, व्यापारी विरोधी और अर्थव्यवस्था के लिए घातक है।
जनता को राहत देनी चाहिए :-
उन्होंने कहा कि आज देश का आम आदमी कमरतोड़ महंगाई से त्रस्त है। थोक महंगाई दर 10 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी है। रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। लोगों की बचत खत्म हो रही है। ऐसे कठिन समय में सरकार को जनता को राहत देनी चाहिए थी, लेकिन राहत देने के बजाय सरकार ने डिजिटल भुगतान पर नया कर थोपकर जनता की बची-खुची बचत को भी तबाह करने की योजना बना ली ।
25 रुपये और 10 हजार के लेनदेन :-
यह सरकार की कथनी और करनी के अंतर का सबसे बड़ा प्रमाण है। श्री चंद्राकर ने कहा कि संसद के भीतर देश के वित्त मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि एकीकृत भुगतान प्रणाली पर किसी भी प्रकार का कर या शुल्क नहीं लगाया जाएगा। देश ने उस बयान पर भरोसा किया था। आज उसी भरोसे को तोड़ दिया गया है। अब कहा जा रहा है कि 5000 के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार के लेनदेन पर 50 रुपये तक की वसूली की जाएगी। यह संसद की गरिमा और जनता के विश्वास दोनों के साथ किया गया सबसे बड़ा धोखा है।
जनता को गुमराह करने वाला :-
श्री चंद्राकर ने कहा कि सरकार यह कहकर अपना पल्ला झाड़ रही है कि यह शुल्क ग्राहक से नहीं व्यापारी से लिया जाएगा। यह तर्क पूरी तरह से जनता को गुमराह करने वाला है। क्या सरकार को इतनी सामान्य समझ भी नहीं है कि व्यापारी यह अतिरिक्त बोझ अपनी जेब से नहीं भरेगा। वह इसकी भरपाई किसी न किसी रूप में ग्राहक से ही करेगा।
कीमत बढ़ाकर यह वसूली :-
उन्होंने कहा कि इसकी वजह से दो स्थितियां बनेंगी। व्यापारी या तो सामान की कीमत बढ़ाकर यह वसूली ग्राहक से करेगा या फिर इस झंझट से बचने के लिए डिजिटल भुगतान लेने से ही मना कर देगा और ग्राहक से कहेगा कि नकद भुगतान दीजिए। दोनों ही परिस्थितियों में अंतिम नुकसान आम आदमी का ही होगा।
दोहरी नीति देश के भविष्य के साथ :-
छोटा दुकानदार, किराना व्यापारी, ठेले-गुमटी वाला पहले ही आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। उस पर यह नया भार डालकर सरकार उसे फिर से नकद व्यवस्था की ओर धकेल रही है। एक तरफ सरकार कैशलेस अर्थव्यवस्था का बड़ा प्रचार करती है और दूसरी तरफ उसी व्यवस्था पर शुल्क लगाकर उसे हतोत्साहित कर रही है। यह दोहरी नीति देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है




