छत्तीसगढ़

गणेश विसर्जन से पहले बड़ा प्रस्ताव… हर झांकी सदस्य का होगा ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट….डीजे की जगह बजेगा गढ़वा बाजा…

 

रायपुर। राजधानी में गणेश विसर्जन झांकी को नशामुक्त, सुरक्षित और संस्कृति से भरपूर बनाने की मांग तेज हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता, अधिवक्ता एवं पूर्व सदस्य छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल मनोज सिंह ठाकुर ने जानलेवा डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध और विसर्जन में अनिवार्य अल्कोहल टेस्ट की मांग को लेकर प्रदेश के DGP, पुलिस कमिश्नर रायपुर डॉ. संजीव शुक्ला, संभागायुक्त, कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में ठाकुर ने जनस्वास्थ्य, शांति और सांस्कृतिक मर्यादा की रक्षा के लिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की है।

अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य हो :-

मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि हर साल विसर्जन झांकी में नशे में धुत लोगों द्वारा उपद्रव, विवाद और अशांति की घटनाएं सामने आती हैं। इसे रोकने के लिए –

झांकी में शामिल होने वाले हर सदस्य और समिति कार्यकर्ता का झांकी मार्ग में प्रवेश से पहले ब्रेथ एनालाइज़र से अनिवार्य अल्कोहल टेस्ट किया जाए।

प्रमुख चौराहों और संवेदनशील मार्गों पर पुलिस बल अल्कोहल डिटेक्शन मशीन के साथ तैनात रहे।

नशे में पाए जाने वाले व्यक्ति को तुरंत भीड़ से अलग कर सुरक्षित घर भेजा जाए और यदि वह अशांति फैलाए तो विसर्जन खत्म होने तक अस्थाई डिटेंशन या थाने में रखा जाए।

जानलेवा डीजे से बुजुर्गों की जान :-

ठाकुर ने कहा कि अनियंत्रित डीजे की कानफोड़ू आवाज और तेज कंपन से बुजुर्गों, हृदय रोगियों, गंभीर मरीजों और छोटे बच्चों की जान पर बन आती है। लगातार तेज आवाज से सुनने की क्षमता खत्म हो रही है। घनी आबादी वाले पुराने मोहल्लों में कंपन से मकानों की दीवारों और छतों में दरारें आ रही हैं। हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद ध्वनि प्रदूषण नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

छत्तीसगढ़िया संस्कृति को मंच दो :-

उन्होंने मांग की कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई – किसी भी धर्म के आयोजन में डीजे की जगह छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए।

डीजे की जगह गढ़वा बाजा, मांदर, झांझ, मंजीरा, दफड़ा, ताशा, निशान, मोहरी, धुमाल, बैंड-बाजा, शहनाई, शंखनाद और नगाड़ा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाए जाएं।

साथ ही आयोजनों में पंथी, राउत नाचा, सुआ, करमा, ददरिया, गेड़ी, बस्तरिया नृत्य, गरबा, डांडिया और भांगड़ा जैसे लोक-नृत्यों को मंच दिया जाए।

ठाकुर ने तर्क दिया कि इससे स्थानीय लोक-कलाकारों को रोजगार मिलेगा, हमारी संस्कृति समृद्ध होगी और भारी-भरकम डीजे वाहनों से लगने वाले भीषण जाम से भी शहर को मुक्ति मिलेगी।

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