बदलाव की बयार: तालाबों में तैर रही है महासमुंद के किसानों की समृद्धि

रायपुर, 15 सितंबर । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के गांव, गरीब और किसान को सशक्त बनाने के विजन को छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धरातल पर उतारा जा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। धान की परंपरागत खेती से आगे बढ़कर जिले के करीब 150 किसान अब मछली पालन, हैचरी और पाउंड लाइनर जैसी आधुनिक गतिविधियों से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहे हैं। सरकारी अनुदान और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं।
बिरकोनी के चंद्राकर बने रोल मॉडल :-
पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत से परेशान बिरकोनी निवासी दिनेश चंद्राकर ने इस योजना से प्रेरणा लेकर मछली पालन की ओर कदम बढ़ाया और आज पूरे जिले के लिए मिसाल बन गए हैं। योजना के तहत उन्होंने लगभग 7.50 लाख रुपये की लागत से 1 हेक्टेयर में तालाब खुदवाया और 14 लाख रुपये की लागत से 20 हजार वर्गफुट में अत्याधुनिक मछली हैचरी स्थापित की।
उत्पादन और कमाई का गणित :-
हैचरी में तैयार मत्स्य बीज को तालाब में डाला जाता है, जिससे महज 8 से 9 महीने में लगभग 15 टन मछली तैयार हो जाती है। 70 से 80 रुपये प्रति किलो की लागत के बाद भी बाजार में 120 से 150 रुपये प्रति किलो तक बिक्री होने से उन्हें बेहतरीन मुनाफा मिल रहा है।
मिला स्थायी रोजगार :-
योजना के तहत तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, मछली बीज हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और फीड प्लांट जैसी परियोजनाओं के लिए सहायता दी जा रही है। इसी का लाभ उठाकर ग्राम बकमा के किसान हिमांशु चंद्राकर ने लगभग 28 लाख रुपये की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट तैयार कराईं। सरकार से 60 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद, सभी खर्च काटकर उन्हें सालाना 3 से 4 लाख रुपये की शुद्ध बचत हो रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजदूरों को भी संबल :-
इस क्रांति का फायदा सिर्फ यूनिट संचालकों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय मजदूरों को भी मिल रहा है। बिरकोनी के मजदूरों का कहना है कि अब उन्हें काम की तलाश में पलायन नहीं करना पड़ता। गांव में ही सालभर नियमित रोजगार मिल रहा है, जिससे करीब 9 हजार रुपये प्रतिमाह की आय से उनके परिवारों का जीवन-यापन आसान हो गया है।
योजना के मुख्य
:-
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नए तालाबों का निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है।
निश्चित ही, धान पर निर्भर महासमुंद के किसानों के लिए अब मछली पालन आत्मनिर्भरता, समृद्धि और विकास का नया प्रतीक बन चुका है l



