CPR आया तो मौत हारी…. सीने पर दो हाथ और बच गई…कार्डियोलॉजी विभाग ने बताया…जान बचाने का फॉर्मूला…

रायपुर, 29 सितम्बर । कार्डियक अरेस्ट में पहला एक मिनट ही जिंदगी और मौत के बीच की सबसे बड़ी दीवार होता है। अगर इस गोल्डन मिनट में सही तरीके से सीपीआर दे दिया जाए तो किसी की भी जान बचाई जा सकती है। इसी जीवनदायी संदेश के साथ डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) के कार्डियोलॉजी विभाग ने आज एक अनूठी पहल की।
CPR का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण :-
विभाग द्वारा ओपीडी परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के लिए सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में परिजनों को महज किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि पुतले पर हाथों से दबाव देकर CPR का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया गया।
यह रहे प्रमुख रूप से मौजूद :-
कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. देवप्रिया लकड़ा, कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ चिकित्सक और मेडिकल छात्र मौजूद रहे।
धड़कन रुक जाना :-
डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने कहा, “कार्डियक अरेस्ट यानी अचानक दिल की धड़कन रुक जाना। इसमें मरीज अचानक बेहोश हो जाता है और सांस लेना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में एम्बुलेंस या अस्पताल पहुंचने का इंतजार करना सबसे बड़ी भूल है। शुरुआती 3-4 मिनट में अगर पास खड़ा व्यक्ति छाती के सही स्थान पर सही तरीके से दबाव देना शुरू कर दे, तो दिमाग और दिल तक खून का प्रवाह बना रहता है।”
CPR मरीज के लिए संजीवनी :-
डॉ. देवप्रिया लकड़ा ने बताया, “हर मिनट की देरी जान पर भारी है। समय पर शुरू किया गया CPR, डॉक्टरों के पहुंचने तक मरीज के लिए संजीवनी का काम करता है। यह हर परिवार के एक सदस्य को आना ही चाहिए।”
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को :-
1. कार्डियक अरेस्ट की पहचान कैसे करें,
2. तुरंत इमरजेंसी नंबर पर सूचना कैसे दें,
3. छाती पर कहाँ और कितनी तेजी से दबाव देना है,
4. कब तक CPR जारी रखना है,
इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से डेमो दिया गया।
कार्डियोलॉजी विभाग का कहना है कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों को डर से निकालकर उन्हें फर्स्ट रिस्पॉन्डर बनाना है, ताकि आपात स्थिति में वे घबराने के बजाय किसी की जिंदगी बचा सकें।



