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शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती की मांग… JNM मेडिकल कॉलेज में हंगामा… यूनियन ने किया घेराव-प्रदर्शन…

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रायपुर 27 जुलाई  ।   छत्तीसगढ़ के नवीन शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक के पदों पर नियमित भर्ती की मांग को लेकर आज जे.एन.एम. मेडिकल कॉलेज, रायपुर में यूनियन द्वारा जोरदार प्रदर्शन और घेराव किया गया।

भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप :-

संगठन अध्यक्ष ने बताया कि विभाग द्वारा सर्वप्रथम प्राप्त 2000 आवेदकों के आधार पर प्रवीण सूची जारी की गई, फिर पात्र-अपात्र सूची और दावा-आपत्ति के बाद सीधे साक्षात्कार (इंटरव्यू) लिस्ट मेरिट के आधार पर जारी कर दी गई।

आरोप है कि मेरिट लिस्ट को सार्वजनिक / ओपन नहीं किया गया, जिससे अभ्यर्थियों में भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को लेकर भारी आक्रोश है।

मामला हाईकोर्ट पहुंचा, सचिव को अवमानना नोटिस :-

इसी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव IAS अमित कटारिया को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह अवमानना याचिका अभय किस्पोट्टा, डॉ. अजय त्रिपाठी एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता नेल्सन पन्ना, आशुतोष मिश्रा एवं रूपेश साहू द्वारा दायर की गई है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा 9 मार्च 2023 को दिए गए फैसले का 3 साल बाद भी विधि-सम्मत पालन नहीं किया गया है।

क्या था 2023 का फैसला ?

दरअसल मामला वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने WPS क्रमांक 7187/2021 एवं अन्य संबंधित याचिकाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ मेडिकल एजुकेशन राजपत्रित सेवा भर्ती नियम 2013 की अनुसूची-3 के नोट-2 तथा 8 दिसंबर 2021 के भर्ती विज्ञप्ति के क्लॉज-5 को चुनौती दी थी।

9 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इन प्रावधानों को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया था। न्यायालय ने कहा था कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक की सीधी भर्ती में 100% महिला आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अनुरूप नहीं है।

CGPSC ने भी मांगा था संशोधित प्रस्ताव ;-

अवमानना याचिका में बताया गया कि फैसले के कुछ दिन बाद ही 15 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर हाईकोर्ट के निर्णय की जानकारी दी थी और निर्णय के अनुरूप संशोधित अधियाचन (Requisition) भेजने का अनुरोध किया था, ताकि नियमित भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

याचिकाकर्ता अभय किस्पोट्टा का आरोप है कि विभाग ने न तो भर्ती नियमों में संशोधन किया और न ही संशोधित अधियाचन आयोग को भेजा, जिसके कारण नियमित भर्ती प्रक्रिया लटकी हुई है।

नियमित भर्ती की जगह संविदा भर्ती का आरोप :-

याचिकाकर्ता डॉ. अजय त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के फैसले का पालन करने के बजाय चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। इस विज्ञापन को भी त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

याचिकाकर्ता एलुश खलखो का कहना है कि रिट याचिका की सुनवाई के दौरान स्वयं राज्य सरकार की ओर से 15 मार्च 2023 के CGPSC के पत्र का उल्लेख किया गया था, जिससे स्पष्ट है कि विभाग को हाईकोर्ट के निर्णय की पूरी जानकारी थी।

मामले की सुनवाई करते हुए 23 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति बी. डी. गुरु की एकल पीठ ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया IAS को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सचिव का जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

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