छत्तीसगढ़

चोलामंडलम का 5.74 लाख का चेक बाउंस…कोर्ट ने कर दिया गेम ओवर…व्यापारी की होशियारी निकली धरी की धरी…

रायपुर, 3 सितंबर l। चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से लिए गए वाहन ऋण के मामले में न्यायालय ने चेक बाउंस के आरोपी को दोषी माना है। निर्णय 22 अगस्त को सुरक्षित रखा गया था, जिसे 3 सितंबर 2026 को सुनाया गया।

क्या है मामला: –

परिवादी यादव कांबले, प्राधिकृत अधिकारी चोलामंडलम कंपनी ने बताया कि अभियुक्त देवेन्द्र देवांगन, प्रोपराइटर मां परमेश्वरी ट्रेडर्स ने लोन अकाउंट नंबर XVFPRPV00002519015 & XVFPRPV00003810787 के एवज में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का चेक क्र. 88621, राशि 5,74,039/- रुपये, दिनांक 24.01.2022 दिया था। जब कंपनी ने यह चेक ICICI बैंक शाखा तेलीबांधा, रायपुर में जमा किया तो चेक दिनांक 31.01.2022 को “Other Reasons Please Specify / Inoperative Account” की टीप के साथ अनादरित होकर वापस आ गया।

समय में भुगतान नहीं किया :-

कंपनी ने अभियुक्त को उसके सही पते पर पंजीकृत डाक से दिनांक 22.02.2022 को विधिक मांग सूचना पत्र (प्र०पी० 2) भेजा, लेकिन तय समय में भुगतान नहीं किया गया। इस पर कंपनी ने धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 के तहत परिवाद न्यायालय में पेश किया।

कोर्ट में क्या हुआ:-

परिवादी पक्ष से यादव कांबले (प०सा०-1) और बैंक साक्षी सुधांशु शर्मा (प०सा०-2) ने गवाही दी। दस्तावेज प्र०पी० 1 से 7 पेश किए गए। अभियुक्त ने खुद को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाने का आरोप लगाया और बचाव साक्षी (ब०सा०-1) पेश किया। न्यायालय ने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायदृष्टांत 2022 SCC ऑनलाइन दिल्ली 3967 और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ACQA No 554/2024 के हवाले से कहा कि रिटर्न मेमो पर बैंक की सील या हस्ताक्षर न होने से वह शून्य नहीं हो जाता। न्यायालय ने माना कि अभियुक्त द्वारा विधिक दायित्व के भुगतान हेतु चेक दिया जाना, समय पर बैंक में प्रस्तुत होना और अनादरित होना

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