“रिपोर्ट बदली, लक्ष्मण रेखा मिटी”…पूर्व डिप्टी CM टीएस सिंहदेव का बड़ा हमला… बोले- हसदेव को बेच रही है डबल इंजन सरकार… 23 खदानें पूंजीपति मित्रों को

रायपुर/अंबिकापुर । हसदेव अरण्य को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। एनजीटी की रिपोर्ट में नो-गो घोषित तारा कोल ब्लॉक सहित 4 सीमावर्ती खदानों के आवंटन के बाद भाजपा की डबल इंजन सरकार पर बड़ा आरोप लगा है। आरोप है कि सरकार हसदेव की सभी 23 खदानों को चरणबद्ध तरीके से अपने पूंजीपति मित्रों को सौंपकर प्रदेश का भविष्य दांव पर लगाने की तैयारी में है।
नो-गो क्षेत्रों में स्थित :-
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जिन चार कोल ब्लॉकों का जिक्र हो रहा है – तारा, परसा, परसा ईस्ट और कांते बासन – ये सभी हसदेव-अरंड कोलफील्ड के ‘नो-गो’ क्षेत्रों में स्थित हैं। इसके बावजूद इनके आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है।
20,000 एकड़ से अधिक जंगल कॉरपोरेट हवाले?
विरोध कर रहे संगठनों और कांग्रेस का आरोप है कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की आड़ में तारा कोल ब्लॉक सहित 4 सीमावर्ती खदानों के आवंटन से 20,000 एकड़ से अधिक जंगल और जमीन को कॉरपोरेट खनन के हवाले कर दिया गया है। सरकार द्वारा कुल 9 कोल ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें से 5 ब्लॉक हसदेव अरण्य क्षेत्र में ही आते हैं, जहां हाथियों और अन्य वन्य जीवों का सर्वाधिक मूवमेंट है।
रामगढ़ की पहाड़ी खतरे में :-
इस अंधाधुंध खनन से केवल जंगल ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति और जल सुरक्षा पर भी संकट मंडरा रहा है। आरोप के मुताबिक, इससे हमारी आस्था का केंद्र, ऐतिहासिक और श्रद्धेय रामगढ़ की पहाड़ी – जो विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला है और राम वन गमन परिपथ में शामिल है – उसका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। साथ ही हसदेव अरण्य के प्राचीन और सघन जंगल, हसदेव नदी और उस पर बना मिनीमाता बांगो बांध भी गंभीर खतरे की जद में आ जाएंगे। वही बांध जो मध्य छत्तीसगढ़ के कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ सहित कई जिलों के लाखों हेक्टेयर खेतों को सींचता है और किसानों की प्यास बुझाता है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने लगाए गंभीर आरोप :-
इस पूरे मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार को घेरा है। सिंहदेव ने कहा है कि केते एक्सटेंशन परियोजना से उत्तर छत्तीसगढ़ की पहचान रामगढ़ के अस्तित्व को खतरा है और उन्होंने कोल ब्लॉक की अनुमति निरस्त करने की मांग की है।
लक्ष्मण रेखा’ खींची गई थी:-
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मंजूरी देने के लिए वास्तविक रिपोर्ट को बदल दिया है। सिंहदेव ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में डॉ. रमन सिंह की सरकार के दौरान कांग्रेस के दबाव और जनहित को देखते हुए एक ‘लक्ष्मण रेखा’ खींची गई थी, जिसके तहत उदयपुर और हसदेव क्षेत्र में केवल एक कोल खदान को ही अनुमति दी गई थी और भविष्य में नई खदानें न खोलने का वादा किया गया था। उस लक्ष्मण रेखा को अब मिटाया जा रहा है।
विनाश की तैयारी :-
सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में चल रही अनियंत्रित खनन गतिविधियां “प्राकृतिक संसाधनों की लूट” है और सरकार पूंजीपतियों की गुलाम बन गई है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा केवल हसदेव के जंगलों को नहीं, बल्कि अपने पूंजीपति मित्रों के स्वार्थ के लिए पूरे उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ के अस्तित्व, संस्कृति, जल सुरक्षा और पर्यावरण के विनाश की तैयारी कर रही है



