सख्ती ऐसी कि बर्खास्तगी… दरियादिली ऐसी कि प्रमोशन…सोच ऐसी कि मैनेजर भी CEO…किसान फर्स्ट आइडिया से केदार गुप्ता ने एक साल में बदल दी अपेक्स बैंक की कहानी…

रायपुर. 20 अगस्त ।। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) के इतिहास में 11 जून 2025 का दिन दर्ज हो गया, जब कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त अध्यक्ष केदार गुप्ता ने पदभार ग्रहण किया। 11 जून 2026 को उनके कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया। यह एक साल सिर्फ समय का आंकड़ा नहीं, बल्कि कड़े फैसलों, सख्ती और सुधार का पूरा अध्याय है।
एक साल के भीतर केदार गुप्ता ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो तो वर्षों से लटके काम भी महीनों में पूरे होंगे ।
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एक साल का लेखा-जोखा – क्या-क्या किया?
1) जीरो टॉलरेंस: बरमकेला, रायगढ़ और अंबिकापुर ब्रांच में ऐतिहासिक कार्रवाई
पदभार लेते ही केदार गुप्ता को रायगढ़, अंबिकापुर, बरमकेला सहित अन्य जिलों की शाखाओं से पुरानी शिकायतें मिलीं। उन्होंने सभी शिकायतों को एकीकृत कर जांच टीम गठित की और पहला ऐतिहासिक फैसला लिया – बर्खास्तगी। यह अपेक्स बैंक के इतिहास में पहली बार हुआ, जब शिकायतों के आधार पर इतनी बड़ी और सीधी कार्रवाई की गई।
वीडियो में खुद केदार गुप्ता ने कहा:-
रायगढ़ ब्रांच से भी शिकायत आई थी, अंबिकापुर ब्रांच से भी कुछ शिकायतें मिली थीं… सबको एकीकृत करके पूरी जांच की जा रही है, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।”
2) बड़ी उपलब्धि: जिला सहकारी बैंकों में CEO नियुक्ति का नियम बदला :-
आदेश: पंजीयक महादेव कावरे का आदेश क्रमांक 2209, दिनांक 05/05/2026, बोर्ड प्रस्ताव पर जारी।
पहले: सिर्फ वरिष्ठ प्रबंधक ही CEO बन सकते थे।
अब: प्रबंधक स्तर के अधिकारी भी RBI के फिट एंड प्रॉपर मापदंड पर CEO बन सकेंगे।
फायदा: 6 जिला बैंकों में खाली CEO के पद भरेंगे और कर्मचारियों को प्रमोशन का बड़ा अवसर मिलेगा।
3) दो कर्मचारियों का वो आदेश:-
भिलाई ब्रांच में पदस्थ दो महिला कर्मचारी लंबे अरसे से एक आदेश का इंतजार कर रही थीं। फाइलें धूल खा रही थीं। केदार गुप्ता ने उस फाइल को बोर्ड में रखा और बोर्ड से पारित कराकर उस पर मुहर लगवा दी। इससे कर्मचारियों को सीधा लाभ मिला। ऐसे ही कई लंबित मामलों को उन्होंने एक-एक कर निपटाया।
4) प्रमोशन का ताला खुला ;-
वर्षों से प्रमोशन का मुद्दा अटका हुआ था। केदार गुप्ता ने इसे अपनी प्राथमिकता में लिया। एक साल के भीतर प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर ठोस कार्रवाई शुरू की गई, जिसके लिए कमेटी भी गठित हो चुकी है। इससे कर्मचारियों में नई ऊर्जा आई है।
5)। नवाचार के साथ ‘किसान फर्स्ट’:-
केदार गुप्ता ने कहा, “नवाचार के साथ छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक एक नए आयाम को छू रहा है। किसान भाइयों का भुगतान बहुत फास्ट हो रहा है।” आज किसानों का भुगतान पहले के मुकाबले कई गुना तेज हो रहा है। अब बैंक हाउसिंग लोन के क्षेत्र में भी नए कदम उठा रहा है।
निष्कर्ष: एक साल, कई मिसाल :-
11 जून 2025 से 11 जून 2026 तक के इस एक साल में केदार गुप्ता ने सख्त प्रशासक, कर्मचारी हितैषी और किसान हितैषी – तीनों भूमिकाएं बखूबी निभाई हैं। यही वजह है कि बैंक के कर्मचारी से लेकर किसान तक कह रहे हैं – केदार गुप्ता ने जो कहा, वो किया।
हालांकि इस दौरान उन्हें बैंक प्रशासन, विशेषकर प्रबंध संचालक से असहयोग का भी सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने यह बता दिया कि कैबिनेट मंत्री दर्जा का अधिकार क्या होता है। विशेष सहायक को हटाकर बैंक में ही पदस्थ करने जैसे फैसले को भी उनकी इस एक साल की उपलब्धि में गिना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि प्रबंध संचालक के (सेवानिवृत्ति) के दिन गिनती के ही बचे हैं, उसके बाद तो हर दिन केदार गुप्ता की ही बात होगी।



