“अभया 2026” : महिलाओं और बालिकाओं को कानूनी रूप से सशक्त करने की अनूठी पहल
रायपुर। महिलाओं एवं बालिकाओं को कन्या सुरक्षा, कानूनी अधिकार और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से वीर फाउंडेशन द्वारा “अभया 2026” विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन रविवार को विमतारा, शांति नगर, रायपुर में किया गया। कार्यशाला में जैन समाज की बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों और बालिकाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।
कार्यशाला में अतिथि वक्ताओं के रूप में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश श्री गौतम चौरड़िया, पूर्व प्रधान जिला न्यायाधीश एवं पूर्व रजिस्ट्रार जनरल श्री नीलम चंद सांखला, पुलिस उपायुक्त (उत्तर ज़ोन) रायपुर श्रीमती दीपमाला कश्यप और प्रख्यात मोटिवेशनल स्पीकर श्री प्रफुल्ल पारख, नागपुर ने शिरकत की।
अपने उद्बोधन में डीसीपी श्रीमती दीपमाला कश्यप ने साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता पर विस्तार से जानकारी दी। मोटिवेशनल स्पीकर श्री प्रफुल्ल पारख ने आत्मरक्षा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास पर मार्गदर्शन दिया। श्री नीलम चंद सांखला ने महिला सुरक्षा कानूनों और न्यायिक संरक्षण पर प्रकाश डाला, वहीं श्री गौतम चौरड़िया ने कहा कि कानूनी जागरूकता ही सुरक्षित समाज की सबसे बड़ी शक्ति है।
आकर्षण का केंद्र रहा “कानूनी तम्बोला”
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण जैन एडवोकेट्स ग्रुप, रायपुर द्वारा आयोजित “कानूनी तम्बोला” रहा। इस अभिनव पहल के जरिए प्रतिभागियों को महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण, साइबर सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी रोचक अंदाज में दी गई।
वीर फाउंडेशन के अध्यक्ष अधिवक्ता प्रवीण जैन ने कहा, “अभया केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में कानूनी जागरूकता का सतत अभियान है। इसका उद्देश्य महिलाओं, बालिकाओं और युवाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है ताकि वे किसी भी अन्याय और शोषण का कानूनी रूप से दृढ़ता से सामना कर सकें।” उन्होंने बताया कि यह अभया की पहली कड़ी है और भविष्य में सर्व समाज के लिए महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण, साइबर सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला लगातार आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम की सफलता में फाउंडेशन के सचिव राहुल जैन, कोषाध्यक्ष मनोज बोथरा, श्रीमती कुसुम श्रीश्रीमाल, श्रीमती ममता जैन, सिद्धार्थ डागा, सौरभ जैन, बबिता जैन, दीप्ति बैद, समृता जैन, ऋतू जैन, ऋचा जैन सहित जैन एडवोकेट्स ग्रुप, समस्त जैन महिला मंडलों और स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा।



