खेल संघों की मनमानी अब खत्म! खिलाड़ी की आवाज दबाई तो..,न्यायाधिकरण से सुप्रीम कोर्ट तक जंग – प्रवीण जैन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। अब खिलाड़ियों को अपने हक और सम्मान के लिए अकेले नहीं लड़ना पड़ेगा। खिलाड़ियों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए कांग्रेस स्पोर्ट्स सेल ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी स्पोर्ट्स सेल के प्रदेश अध्यक्ष और अधिवक्ता प्रवीण जैन ने खिलाड़ियों की कानूनी सहायता एवं संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई के लिए विशेष पहल शुरू करने का ऐलान किया है।
अधिवक्ता प्रवीण जैन ने कहा कि खिलाड़ी केवल मैदान में पसीना बहाने के लिए नहीं है, उसे न्याय, समान अवसर, सम्मान और सुरक्षित खेल वातावरण का भी पूरा अधिकार है। अगर किसी खिलाड़ी के साथ चयन में पक्षपात, भेदभाव, मनमानी, गलत तरीके से टीम से बाहर करना, पुरस्कार रोकना या किसी भी तरह का शोषण होता है तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए।
संविधान से लेकर नए कानून तक :-
प्रवीण जैन ने बताया कि भारत का संविधान खिलाड़ियों को भी पूरा संरक्षण देता है –
• अनुच्छेद 14 एवं 15: समानता और गैर-भेदभाव का अधिकार
• अनुच्छेद 16: सार्वजनिक अवसरों में समानता
• अनुच्छेद 21: व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं गरिमा का अधिकार
इसके साथ ही केंद्र सरकार के राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 में भी खिलाड़ियों के लिए कई बड़े प्रावधान किए गए हैं, जिसमें खेल संस्थाओं के लिए आचार संहिता, महिला और नाबालिग खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित खेल नीति (Safe Sports Policy) और आंतरिक शिकायत निवारण व्यवस्था शामिल है। खेल विवादों के लिए राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (National Sports Tribunal) की भी व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम 2022, POSH एक्ट 2013 और POCSO एक्ट 2012 के तहत भी खिलाड़ियों को परिस्थिति अनुसार कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
इन 11 मामलों में कर सकते हैं संपर्क :-
अधिवक्ता प्रवीण जैन ने स्पष्ट किया कि यदि किसी खिलाड़ी को इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो वह दस्तावेजों के साथ संपर्क करे –
1. चयन में पक्षपात या भेदभाव
2. बिना कारण टीम या प्रतियोगिता से बाहर करना
3. चयन प्रक्रिया में मनमानी
4. अनुचित निलंबन या प्रतिबंध
5. पुरस्कार, छात्रवृत्ति या प्रोत्साहन राशि रोकना
6. खेल संघ या अधिकारी द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग
7. महिला खिलाड़ी के साथ यौन उत्पीड़न या असुरक्षित व्यवहार
8. नाबालिग खिलाड़ी से दुर्व्यवहार या शोषण
9. डोपिंग मामलों में प्रक्रिया का उल्लंघन
10. जाति, लिंग, धर्म के आधार पर भेदभाव
11. खेल से जुड़ा कोई भी अन्य अन्याय
“खिलाड़ी की आवाज अब दबेगी नहीं”
अपने बयान में प्रवीण जैन ने कहा :-
“हमारा उद्देश्य किसी खेल संस्था के विरुद्ध अनावश्यक विवाद खड़ा करना नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। जहां वास्तविक अन्याय होगा, वहां खिलाड़ी की लड़ाई खेल संघ से लेकर वैधानिक प्राधिकरण, राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण और न्यायालय तक पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी। खिलाड़ी की आवाज अब दबेगी नहीं।”
उन्होंने सभी खिलाड़ियों से अपील की है कि वे अन्याय को सहन न करें और अपनी शिकायत लिखित में सुरक्षित रखें। शिकायत मिलने पर तथ्यों और नियमों का परीक्षण कर उचित कानूनी मार्गदर्शन दिया जाएगा।




