सरकारी कागज पर मौत की मोहलत… तीन नसें 90% बंद… डॉक्टर ने लिखा – तुरंत बायपास करो… सिस्टम ने लिखा – 1 महीने बाद आओ…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में हृदय रोग कितना विस्फोटक रूप ले चुका है और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी लाचार है, इसका खुलासा डॉ. बी.आर. अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर की एक डिस्चार्ज रिपोर्ट से हुआ है।
अस्पताल के हृदय रोग विभाग में भर्ती एक मरीज की जांच रिपोर्ट दिल दहला देने वाली है। एंजियोग्राफी रिपोर्ट के अनुसार मरीज के दिल की तीनों प्रमुख धमनियों में गंभीर रुकावट है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:-
_ एलएडी धमनी में 90 प्रतिशत तक रुकावट
_ आरसीए धमनी 100 प्रतिशत बंद – पूरी तरह से कट-ऑफ
_ डी-1 धमनी में 80 प्रतिशत ब्लॉकेज
_ दिल की पंपिंग क्षमता यानी ईएफ मात्र 45 प्रतिशत रह गई है, जो सामान्य से काफी कम है।
जीवन बचाने का एकमात्र उपाय :-
डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है – CAD-TVD यानी ट्रिपल वेसल डिजीज और अर्ली सीएबीजी। अर्थात तुरंत बाईपास सर्जरी ही जीवन बचाने का एकमात्र उपाय है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहीं से खड़ा होता है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ने इलाज करने के बजाय मरीज को “डिस्चार्ज एंड रेफर टू सीटीवीएस” लिखकर वापस भेज दिया है।
यानी अम्बेडकर अस्पताल के पास आज भी हृदय की बाईपास सर्जरी के लिए पर्याप्त और त्वरित सुविधा नहीं है।



