जर्जर स्कूल, गायब शिक्षक…खाते में पड़े 690 करोड़! छत्तीसगढ़ में शिक्षा के नाम पर कैसा खेल?

रायपुर 8 अक्टूबर । जब छत्तीसगढ़ के सुदूर गांवों में बच्चे टूटी छतों के नीचे, बिना शिक्षक के पढ़ने को मजबूर हैं, तब सरकार क्या कर रही थी?
दस्तावेजों ने खोली पोल:-
वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर द्वारा भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से RTI के तहत निकाले गए आधिकारिक दस्तावेजों ने शिक्षा विभाग की पूरी पोल खोल दी है।
आंकड़े चौंकाने वाले हैं और सरकार की नीयत पर सीधा सवाल खड़ा करते हैं।
सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?
साल 2023-24:-
केंद्र ने छत्तीसगढ़ के बच्चों के लिए ₹776.59 करोड़ भेजे। इसमें से ₹312.25 करोड़ सरकार खर्च ही नहीं कर पाई। पैसा खाते में पड़ा रहा, स्कूल खंडहर बने रहे।
साल 2024-25:-
केंद्र ने फिर भरोसा दिखाते हुए ₹830.65 करोड़ जारी किए। इस बार भी ₹378.52 करोड़ अनस्पेंट रह गए।
कुल मिलाकर दो साल में ₹690.77 करोड़ से ज्यादा केंद्र का पैसा बिना इस्तेमाल के लौटने की कगार पर है।
पैसा कहां गया ?
साल 2025-26 में तो हद ही हो गई: केंद्र ने रिकॉर्ड ₹993.40 करोड़ जारी किए, लेकिन राज्य सरकार ने आज तक केंद्र को उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) ही नहीं भेजा। यानी हिसाब ही नहीं दिया कि पैसा कहां गया?
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय का पत्र क्रमांक F. No. 22-1/2026-SS.4 01.10.2026 इस बात का पुख्ता सबूत है।
मनोज सिंह ठाकुर का सीधा हमला:-
“एक तरफ बस्तर-सरगुजा में स्कूलों में शिक्षक नहीं, भवन नहीं, टॉयलेट नहीं। दूसरी तरफ केंद्र से आया 690 करोड़ रुपया सरकार तिजोरी में दबाकर बैठी है। ये लापरवाही नहीं, ये छत्तीसगढ़ के लाखों बच्चों के भविष्य के साथ अपराध है।”
“2025-26 का UC नहीं भेजना साबित करता है कि या तो जमीन पर काम ही नहीं हुआ है, या वित्तीय गड़बड़झाला है। इसका खामियाजा आने वाले सालों में भुगतना पड़ेगा, जब केंद्र इसी बहाने से हमारा शिक्षा अनुदान काट देगा।”
सबसे बड़ा सवाल :-
जब गांव के स्कूल को पैसे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब ये करोड़ों रुपये सरकारी फाइलों में क्यों सड़ रहे थे? किसकी लापरवाही से हमारे बच्चों का हक मारा गया?
मनोज सिंह ठाकुर ने इस पूरे घोटाले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।




