कागज पर स्मार्ट सिटी सुपरहिट… जमीन पर फेल…मोतीबाग- कुशालपुर प्रोजेक्ट अधूरे…ठेकेदारों को क्लीन चिट…अब EOW करेगी हिसाब…

रायपुर 9 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी मिशन में ₹1,764 करोड़ के महाघोटाले का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को EOW में हलचल तेज हो गई। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने अपने साथी अधिवक्ता विजय राठौड़ और राघवेंद्र सिंह के साथ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) मुख्यालय पहुंचकर अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक को ‘आपराधिक संज्ञान शिकायत पत्र’ सौंपा और FIR दर्ज करने की मांग की।शिकायत की कॉपी मुख्य सचिव, छ.ग. शासन और पुलिस महानिरीक्षक को भी भेजी गई है।
पैसा 100% खर्च- फाइल में रिपोर्ट जीरो :-
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने बताया कि भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) से RTI में मिला आधिकारिक पत्र (क्रमांक K-15015/1/RTI/2026-SC-I/9210416, 14.09.2026) इस पूरे घोटाले का सबसे बड़ा सबूत है।
RTI के मुताबिक दोनों शहरों में ₹1,764 करोड़ का सरकारी फंड कागजों पर 100% खर्च दिखा दिया गया है, लेकिन केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में एक भी काम की थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TQA) रिपोर्ट और फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट मौजूद ही नहीं है।
बिना क्वालिटी जांच पूरा भुगतान:-
जमीन पर प्रोजेक्ट अधूरे, कागज पर पेनाल्टी निल् शिकायत में आरोप है कि मोतीबाग 24×7 वाटर सप्लाई और कुशालपुर-संतोषी नगर ड्रेनेज जैसे बुनियादी प्रोजेक्ट डेडलाइन के सालों बाद भी अधूरे पड़े हैं। इसके बावजूद तत्कालीन MD/CEO और नोडल इंजीनियरों ने चहेते ठेकेदारों पर ‘शून्य पेनाल्टी’ (Nil Penalty) लगाई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान और ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचा।
अधिवक्ताओं के अनुसार यह कृत्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 13(1)(a), 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316, 318 व 61(2) के तहत गंभीर संज्ञेय अपराध है।
अब क्या मांग?
1. EOW तत्काल फॉरेंसिक और तकनीकी जांच शुरू करे
2. स्मार्ट सिटी के सभी मूल मेजरमेंट बुक (MB), रनिंग/फाइनल बिल जब्त किए जाएं
3. दोषी लोकसेवकों और संविदाकारों पर तत्काल FIR दर्ज हो
विधिक दल ने चेतावनी दी है कि यदि EOW समयबद्ध कार्रवाई नहीं करती है तो वे सक्षम विशेष न्यायालय और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।



