छत्तीसगढ़

आचार्य इन्द्रेश महाराज ने कहा…प्राण सोशल मीडिया में फंस गए.. तकनीक सुविधा है, निर्भरता नहीं…

रायपुर। प्रसिद्ध कथावाचक एवं आध्यात्मिक वक्ता आचार्य इन्द्रेश महाराज ने कहा है कि आज इंसान सोशल मीडिया में सिमटता जा रहा है। उसकी स्थिति ऐसी हो गई है मानो उसके प्राण ही सोशल मीडिया में चले गए हैं। इंटरनेट से दूर होते ही वह खुद को समाज से कटा हुआ महसूस करने लगता है।

तकनीक ने जीवन को सुविधा दी :-

रायपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में पत्रकारों से संवाद करते हुए आचार्य इन्द्रेश महाराज ने कहा कि आध्यात्मिकता अब केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सही दिशा देने की जरूरत बन गई है। तकनीक ने जीवन को सुविधा दी है, लेकिन जब सुविधा ही निर्भरता बन जाए तो यह चिंतन का विषय है।

युवाओं को दिया 440 वोल्ट का संदेश :-

आचार्य इन्द्रेश महाराज ने Gen-Z और युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि युवाओं में 440 वोल्ट जैसी अपार ऊर्जा है। उस ऊर्जा से बल्ब जलाकर समाज को रोशन करो, किसी को छुआकर तड़पाओ मत। अपनी शक्ति को रचनात्मक कार्यों में लगाओ। आंदोलन करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन धर्म, मंदिर या किसी व्यक्ति के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए।

राजनीति में धर्म हो-धर्म में राजनीति नहीं :-

धर्म और राजनीति के संबंध पर आचार्य जी ने साफ कहा – “राजनीति में धर्म का प्रवेश होना चाहिए, लेकिन धर्म में राजनीति नहीं होनी चाहिए।” राजनीति बिना धर्म के नहीं चल सकती, लेकिन धर्म राजनीति के बिना भी चल सकता है। धर्म का काम समाज को संस्कार देना है।

मंदिर संस्कार के केंद्र :-

मंदिरों में वीआईपी दर्शन पर आचार्य इन्द्रेश महाराज ने तिरुपति बालाजी का उदाहरण दिया। कहा कि बड़े मंदिरों से सैकड़ों परिवारों का भरण-पोषण होता है, इसलिए व्यवस्था जरूरी है। मंदिर सिर्फ पूजा के स्थान नहीं, संस्कार और सेवा के केंद्र हैं।

गौ-संरक्षण पर बोले:-

गोवंश संरक्षण पर आचार्य इन्द्रेश महाराज ने कहा कि “मां को मां घोषित करने के लिए अगर बालक ही लड़ रहे हैं, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है।” गाय भारतीय कृषि और जीवन का आधार रही है। गोबर की खाद से लेकर पारंपरिक खेती तक, हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा।

उन्होंने गरबा आयोजनों, चमत्कारों और चुनावी आरोपों पर भी आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अपनी बात रखी और कहा कि गृहस्थ जीवन का आधार भी भक्ति और आध्यात्मिकता ही है

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