किसानों का धान…मिलरों का खेल…अफसर मौन…छत्तीसगढ़ में 77 हजार टन चावल घोटाले का पर्दाफाश…

रायपुर, 29 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और कस्टम मिलिंग के नाम पर क्या सरकारी खजाने को लूटने का सुनियोजित खेल चल रहा है? FCI मण्डल कार्यालय, से RTI में मिले एक सनसनीखेज जवाब ने इस आशंका को पुख्ता कर दिया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राजनेता मनोज सिंह ठाकुर को मिले आधिकारिक दस्तावेज (FCI पत्र क्र. DO RYP-35011/60/2026-35, दिनांक 28.10.2026) ने पूरे सिस्टम की मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
RTI का सबसे बड़ा खुलासा:-
कुल अमानक घोषित CMR चावल: 77,402.25 मीट्रिक टन
अवधि: 01 जनवरी 2023 से अब तक
दायरा: केवल एक मंडल – रायपुर
विजिलेंस जांच: 0 | FIR: 0 | बैंक गारंटी जब्त: 0
चार बड़े सवाल जो FCI और मार्कफेड से पूछे जा रहे हैं:
1. जब 77 हजार टन रिजेक्ट हुआ तो रिकवरी कहां है?
FCI ने माना 77,402 MT चावल अमानक है। सवाल है- मिलरों से इसके बदले मानक चावल जमा कराया गया या नहीं? इसका कोई हिसाब RTI जवाब में नहीं है।
2. अमानत में खयानत, FIR क्यों नहीं?
सरकारी धान मिलरों को अमानत के तौर पर दिया जाता है। अमानक चावल देना सीधे तौर पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपराध है। FCI कार्रवाई का ठीकरा मार्कफेड पर फोड़ रहा है।
3. 77 हजार टन रिजेक्शन छोटी बात:-
इतने बड़े पैमाने पर रिजेक्शन पर स्वतः विजिलेंस जांच का नियम है। FCI ने खुद स्वीकार किया है कि केंद्रीय सतर्कता दल ने कोई जांच नहीं की।
4. खामियाजा किसान क्यों भुगते:-
मानक चावल जमा न होने से गोदाम जाम हैं, सोसायटियों से धान उठाव अटका है। यह सीधे-सीधे अन्नदाता पर वार है।
मनोज सिंह ठाकुर का अल्टीमेटम:-
“यह कोई लापरवाही नहीं, संगठित गोलमाल है। 77 हजार टन खाद्यान्न का रिजेक्शन पूरे प्रदेश के लिए खतरे की घंटी है। एक अधिवक्ता और जनप्रतिनिधि के तौर पर मैं चुप नहीं बैठूंगा।”
“यदि 7 दिनों के भीतर डिफॉल्टर मिलरों की बैंक गारंटी राजसात कर FIR दर्ज नहीं हुई, तो मैं पूरी फाइल के साथ:
1. CVC, नई दिल्ली में शिकायत
2. EOW/ACB, छत्तीसगढ़ में आपराधिक शिकायत
3. उच्च न्यायालय में PIL दायर कर CBI जांच की मांग करूंगा।”




