मुख्यमंत्री की घोषणा का क्या हुआ ? 20 लाख का बास्केटबॉल… पापड़ी जैसा ग्राउंड, टूटा हुआ बोर्ड…भ्रष्टाचार की हकीकत…


लैलूंगा, रायगढ़ । राष्ट्रीय खेल दिवस और मेजर ध्यानचंद जयंती के अवसर पर जहाँ पूरा देश खेलों को बढ़ावा देने की बात कर रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के लैलूंगा से एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है।
उद्घाटन से पहले ही उखड़ने लगा:-
लैलूंगा नगर पंचायत के कन्या हाई स्कूल में बना 20 लाख रुपये का बास्केटबॉल ग्राउंड उद्घाटन से पहले ही उखड़ने लगा है। ग्राउंड की सतह पापड़ी की तरह हाथ से उखड़ रही है, पूरे मैदान में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं और बास्केटबॉल बोर्ड व पोल एकदम घटिया क्वालिटी के लगाए गए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
समाज सेवी रवि भगत ने बताया कि लैलूंगा में बास्केटबॉल का इतिहास बहुत पुराना है। यहाँ से कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खिलाड़ी निकले हैं। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री के प्रथम लैलूंगा आगमन पर स्थानीय लोगों ने एक नए बास्केटबॉल ग्राउंड की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने खुशी-खुशी 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की।
पैसे का बंदरबांट कैसे हुआ है:-
आगे रवि ने बताए की”बड़ा पीड़ा होता है। जब ये ग्राउंड बन रहा था तो हमने ठेकेदार के साथ बैठकर बताया था कि ग्राउंड कैसे बनना चाहिए। खिलाड़ियों ने बहुत उम्मीद से इसे बनवाया, लेकिन ठेकेदार ने कैसा काम किया ।
काम घटिया हुआ :-
उन्होंने सवाल उठाया कि जब 50 हजार के काम का भी बड़े-बड़े मंत्री फीता काट देते हैं, तो लैलूंगा में रोज चक्कर लगाने वाले राज्यसभा सांसद भी इसका उद्घाटन क्यों नहीं करा पा रहे? क्योंकि सबको पता है काम घटिया हुआ है, उद्घाटन करेंगे तो जनता देखेगी।
भ्रष्टाचार खिलाड़ियों के भविष्य में रोड़ा :-
रवि ने आगे यह भी बताए कि पड़ोसी राज्य झारखंड और उड़ीसा राष्ट्रीय स्तर पर मेडल ला रहे हैं, छत्तीसगढ़ कद-काठी और साधन-सुविधा में उनसे आगे है, फिर भी खेल में दुर्दशा है। इसका सबसे बड़ा कारण जमीनी स्तर पर इसी तरह का भ्रष्टाचार है। “ऐसे भ्रष्टाचार के कारण ही आज छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी नहीं निकल पा रहा है। सरकार खेल अलंकार पुरस्कार देती है, लेकिन धरातल पर सुविधा ऐसी है तो खिलाड़ी कहाँ से निकलेगा?”
इनसे की कार्रवाई की मांग: –
1. नगर पंचायत अध्यक्ष कपिल सिंह से आग्रह किया कि आपके नाक के नीचे हुए इस भ्रष्टाचार की जांच कराएं, दोषी ठेकेदार और निरीक्षण करने वाले इंजीनियर पर कार्रवाई करें।
2. मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि उनके द्वारा घोषित 20 लाख के काम के बंदरबांट पर बिना आवेदन के स्वतः संज्ञान लें।
3. उपमुख्यमंत्री अरुण साव से हाथ जोड़कर निवेदन किया, जिनके पास नगरीय प्रशासन और खेल मंत्रालय दोनों है, कि इस मामले में कड़ा एक्शन लें और मैदान को फिर से अच्छी तरह बनवाकर खिलाड़ियों को सौंपें।




