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छत्तीसगढ़ में पहली बार… दो महीने में 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी…अम्बेडकर अस्पताल ने बनाया नया रिकॉर्ड

रायपुर, 10 अगस्त ।  पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। विभाग ने मात्र 20 दिनों के भीतर फेफड़े की 9 अत्यंत जटिल लोबेक्टॉमी सर्जरी सफलतापूर्वक कर दिखाई है। इस उपलब्धि को मिलाकर पिछले दो महीनों में विभाग ने कुल 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी कर मरीजों को नया जीवन दिया है, जो छत्तीसगढ़ के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

15 साल के सबसे कम उम्र के मरीज की बची जान :-

इस कीर्तिमान को और भी खास बनाता है विभाग द्वारा किया गया सबसे कम उम्र के मरीज का ऑपरेशन। 15 साल के एक किशोर के बाएं फेफड़े के ऊपरी लोब में एस्परजिलोमा नामक खतरनाक फंगस का संक्रमण हो गया था। यह एक दुर्लभ और जानलेवा स्थिति थी। डॉक्टरों ने एडवांस्ड तकनीक से बच्चे के फेफड़े के संक्रमित हिस्से को सफलतापूर्वक निकाल दिया। अब तक के इतिहास में इस उम्र के बच्चे की लोबेक्टॉमी सर्जरी इस संस्थान में पहली बार हुई है। इस सर्जरी में शामिल मरीजों की उम्र 15 साल से लेकर 70 साल तक रही है।

इन 13 में से 2 मरीज ऐसे थे जिन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस) हो रहा था और उनकी हालत बेहद गंभीर थी। इनकी आपातकालीन सर्जरी कर जान बचाई गई।

क्या बोले विभागाध्यक्ष?

हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि “फेफड़े की लोबेक्टॉमी एक अत्यंत ही जटिल सर्जरी होती है, जिसमें फेफड़े के क्षतिग्रस्त हिस्से को शरीर से अलग कर निकाल दिया जाता है। हमारे विभाग में यह सर्जरी अत्याधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर की मदद से की जाती है। इससे भविष्य में होने वाले गंभीर कॉम्प्लिकेशन जैसे ब्रोन्कोप्लूरल फिस्टुला बनने का खतरा न के बराबर रह जाता है। छत्तीसगढ़ में इतने कम समय में इतनी लोबेक्टॉमी सर्जरी होना हमारे संस्थान के लिए गौरव और प्रदेश के लिए गर्व की बात है।”

क्यों बढ़ रहे हैं फेफड़े के ऐसे मामले?

डॉ. साहू के अनुसार छत्तीसगढ़ में लोबेक्टॉमी सर्जरी का सबसे प्रमुख कारण एस्परजिलोमा और ब्रोन्किएक्टैसिस है।एस्परजिलोमा, एस्परजिलस नाइजर (Aspergillus niger) नामक फंगस से होता है। यह संक्रमण अक्सर उन लोगों को होता है जिन्हें पहले टीबी हो चुकी है या जिनकी इम्युनिटी बहुत कमजोर है। यह फंगस सबसे ज्यादा दाएं फेफड़े के ऊपरी हिस्से में पनपता है क्योंकि वहां टीबी के बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण होता है।वहीं ब्रोन्किएक्टैसिस भी टीबी के बाद होने वाली सबसे आम बीमारी है, जिसमें फेफड़े में छोटी-छोटी गुहाएं बन जाती हैं और उनमें संक्रमण से खांसी में खून आने लगता है। इसके अलावा वैस्कुलर मालफॉर्मेशन, लंग एब्सिस और शुरुआती स्टेज का फेफड़े का कैंसर भी खून वाली खांसी का बड़ा कारण है। शुरुआती कैंसर में लोबेक्टॉमी से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।

पूरे प्रदेश का अग्रणी विभाग :-

अम्बेडकर अस्पताल का हार्ट-चेस्ट विभाग पूरे छत्तीसगढ़ में फेफड़े की सर्जरी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां सामान्य तौर पर साल भर में 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होती हैं, लेकिन इस बार दो महीने में ही 13 सर्जरी करना एक रिकॉर्ड है। यहां सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से भी मरीज इलाज कराने आते हैं।

विभाग में फेफड़े की अन्य जटिल सर्जरी जैसे डिकॉर्टिकेशन, सेगमेंटेक्टॉमी और न्यूमोनेक्टॉमी (एक तरफ का पूरा फेफड़ा निकालना) भी नियमित रूप से की जाती है।

सबसे बड़ी बात यह है कि ये सभी महंगे ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निशुल्क किए जाते हैं। विभाग में अभी भी कई मरीज लोबेक्टॉमी सर्जरी के लिए प्रतीक्षा सूची में हैं।

आखिर क्या होती है लोबेक्टॉमी सर्जरी?

हमारे शरीर में दो फेफड़े होते हैं। बायां फेफड़ा दो भागों (अपर और लोअर लोब) से और दायां फेफड़ा तीन भागों (अपर, मिडिल और लोअर लोब) से मिलकर बना होता है।

जब किसी बीमारी जैसे एस्परजिलोमा, ब्रोन्किएक्टैसिस या ट्यूमर के कारण फेफड़े का कोई एक हिस्सा पूरी तरह खराब हो जाता है, तो उस संक्रमित लोब को ऑपरेशन द्वारा निकाल दिया जाता है। इसी प्रक्रिया को लोबेक्टॉमी कहा जाता है। इसमें छाती में चीरा लगाकर आधुनिक स्टेपलर तकनीक से खराब हिस्से को सुरक्षित रूप से अलग किया जाता है। ऑपरेशन के 6 से 8 दिन बाद मरीज को छुट्टी दे दी जाती है।

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