25 साल में 74 हजार को न्याय… मानव अधिकार आयोग ने दिया हिसाब…अब सिर्फ 853 केस पेंडिंग…

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग ने अपनी स्थापना के 25 वर्षों में मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आयोग ने अब तक 74 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया है। यह जानकारी आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक ने सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।
74 हजार से अधिक आवेदन आए :-
नायक ने बताया कि राज्य पुनर्गठन के बाद आयोग का गठन 16 अप्रैल 2001 को हुआ था। यह एक अर्ध-न्यायिक संस्था है, जहां पीड़ित व्यक्ति लिखित में, स्वयं उपस्थित होकर या डाक-ईमेल के माध्यम से न्याय के लिए आवेदन कर सकते हैं। 16 अप्रैल 2001 से 15 मार्च 2026 तक आयोग के पास कुल 74 हजार से अधिक आवेदन आए, जिनका निराकरण किया जा चुका है। वर्तमान में मात्र 853 प्रकरण ही प्रक्रियाधीन हैं, जबकि हर साल औसतन 2500 से अधिक नए मामले आयोग के पास आते हैं।
मुआवजे से लेकर वेतन तक :-
आयोग की अनुशंसा पर शासन ने कई मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिया है। पिछले वर्ष दुर्ग जेल में विचाराधीन बंदी दुर्गेश यादव और बुद्ध पल्लव की मौत पर परिजनों को 5-5 लाख रुपये, वहीं चिकित्सीय लापरवाही में राखी बोरकर और उनके नवजात की मौत पर 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश जारी हुआ। एक अन्य मामले में वेतन न मिलने की शिकायत पर एक शिक्षिका को आयोग की पहल पर 3,29,080 रुपये का भुगतान कराया गया।
आयोग के 5 बड़े अभियान :-
कुष्ठ रोग के खिलाफ मुहिम:-
आयोग के निर्देश पर संबंधित जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा परीक्षण कराया गया, जिसमें 1500 नए कुष्ठ रोगी मिले। सभी का इलाज शुरू करा दिया गया है और वे जल्द ही रोग मुक्त हो जाएंगे ॥
सफाई कर्मियों की सुध:-
मानव अधिकार संरक्षण के तहत आयोग ने एक बड़ा सर्वे कराया। रायपुर जिले के सभी 10 जोन और बिलासपुर जिले के 8 जोन में विभिन्न कॉलेजों के विधि के छात्र-छात्राओं के जरिए लगभग 8000 सफाई कर्मियों का सर्वे किया गया। सर्वे में गंभीर समस्याएं सामने आईं:
निवास और शौचालय की व्यवस्था :-
• 319 कर्मियों के माता-पिता को वृद्धा/विधवा पेंशन नहीं मिल रही
• 1907 कर्मियों के आधार, वोटर, राशन, आयुष्मान, श्रम और हेल्थ कार्ड नहीं बने
• 749 कर्मियों को सुरक्षा सफाई किट नहीं दी गई
• 165 कर्मियों के बच्चे नशे की चपेट में
• 1076 मामलों में ठेकेदार द्वारा ATM पासबुक जमा रखना और वेतन कम/देरी से देना
• लगभग 2387 कर्मचारी PMJJBY/PMSBY योजना से वंचितइन सभी मामलों के निराकरण के लिए रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेजी गई है।
इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए :
छत्तीसगढ़ कॉलेज , एमिटी यूनिवर्सिटी, हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, कुसुमताई दाबके विधि महाविद्यालय, कलिंगा विश्वविद्यालय, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के छात्र -छात्राएं धन्यवाद के पात्र हैं।
वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा:-
वृद्धाश्रमों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाओं को लेकर सभी जिलों से जानकारी जुटाई जा रही है।
ट्रक चालकों के अधिकार:-
25 जून 2025 को परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिए गए कि ट्रक चालकों का नेत्र परीक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण और बीमा कराया जाए। विशेष तौर पर जिन वाहन मालिकों के पास 10 या अधिक वाहन हैं, उनके चालकों का ग्रुप इंश्योरेंस कराया जाए और 10 साल से अधिक अनुभव वाले दुर्घटना-मुक्त चालकों को प्रोत्साहित और सम्मानित किया जाए।
जेल- थानों और छात्रावासों का निरीक्षण :-
आयोग समय-समय पर जेल, अस्पताल, थाना, बाल संप्रेक्षण गृह, आदिवासी छात्रावास, शासकीय शाला, वृद्धाश्रम और नारी निकेतन का निरीक्षण कर अनुशंसा करता है। निरीक्षण के दौरान ट्रेजरी अधिकारियों को लंबित पेंशन प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए गए, जिसके बाद 120 पेंशन प्रकरणों का निराकरण हुआ। हाल के वर्षों में राजनांदगांव, दुर्ग, कोरबा, बिलासपुर, कांकेर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंडागांव और रायगढ़ सहित कई जिलों का निरीक्षण किया गया है।
युवाओं को जोड़ने की पहल :-
मानवाधिकारों के प्रचार-प्रसार के लिए आयोग विश्वविद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित करता है। हर साल देशभर से छात्र इंटर्नशिप के लिए आते हैं। पिछले 5 साल में 631 छात्र लाभान्वित हुए हैं, जिसमें सत्र 2025-26 में सबसे ज्यादा 168 छात्र शामिल है l




