मधुसूदन में दिखता है यादवों का भविष्य…सर्व यादव समाज ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखा पत्र – मधुसूदन यादव को दो कमान!
36 साल की तपस्या, पार्षद से सांसद तक... अब यादव समाज बोला - हमारा नेता, हमारा गौरव - मधुसूदन यादव!

रायपुर / राजनांदगांव। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सिंह के सड़क हादसे के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा में नए अध्यक्ष की दौड़ तेज हो गई है, लेकिन इस बार दौड़ सिर्फ नामों की नहीं, हक की है।
लोगों का हुजूम :-
बृजवासी और पिछड़ों-दलितों-गरीबों के मसीहा कहे जाने वाले मधुसूदन यादव का नाम सबसे आगे है, उस नेता को क्या खोजना जो खुद जनता के बीच रहता हो? राजनांदगांव में एक चौखट ऐसी है जहां सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक दिया जलता है और लोगों का हुजूम लगा रहता है। वो चौखट है मधुसूदन यादव की। क्योंकि व्यवहार ही उनकी राजनीति है।
इसी व्यवहार के दम पर अब सर्व यादव समाज ने आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। सर्व यादव समाज के प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु ने इस मुद्दे पर सीधे दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिख दिया है।
पत्र में दो टूक लिखा है :-
“साहू को साहू बोर्ड, कुर्मी को कुर्मी बोर्ड, तो यादव को क्यों नहीं? मंडल से लेकर विधानसभा तक यादव को ठगा गया है। अब वक्त है यादव की गरिमा बढ़ाने का। मधुसूदन यादव को एक बार प्रदेश अध्यक्ष की कमान दी जाए।”
और ये मांग बेबुनियाद नहीं। मधुसूदन यादव वो नाम है जिसने 1989 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से शुरू कर युवा मोर्चा के शहर महामंत्री, अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष युवा मोर्चा, जिला महामंत्री, दो बार जिला अध्यक्ष और अब प्रदेश उपाध्यक्ष, बालोद प्रभारी, रायपुर क्लस्टर प्रभारी और लोकसभा संयोजक तक का सफर तय किया है। पार्षद वार्ड 05, नेता प्रतिपक्ष, मनोनीत महापौर, अध्यक्ष नगर निगम, 2009 में राजनांदगांव से सांसद और 2015 और फिर 2025 में निर्वाचित महापौर – पार्षद से सांसद तक का पूरा सफर।
पत्र दिल्ली पहुंच चुका है :-
अगर तोखन साहू और संतोष पांडे जैसे नामों पर विचार हो सकता है तो 36 साल से संगठन को खून-पसीने से सींचने वाले मधुसूदन यादव पर क्यों नहीं? छत्तीसगढ़ में साहू के बाद सबसे बड़ी यादव आबादी का जवाब भाजपा कब देगी? पत्र दिल्ली पहुंच चुका है, अब फैसला हाईकमान को करना है।




