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छत्तीसगढ़ अपेक्स बैंक में प्रमोशन का खेल… केदार गुप्ता की अग्नि परीक्षा … नियम जीतेंगे या चहेते ?

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है प्रमोशन और बैक डेट में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर का कथित खेल। बैंक के अध्यक्ष केदार गुप्ता के चारों ओर कुछ अधिकारियों का ऐसा जमावड़ा लगा है, जो अपना प्रमोशन पक्का करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।

सहकारिता विभाग  के अधिकारी की मानें तो बैंक में बिना सीनियरिटी लिस्ट जारी किए प्रमोशन की तैयारी चल रही है, जो सीधे-सीधे सहकारिता नियमों का उल्लंघन है। नियम स्पष्ट कहता है कि सीनियरिटी लिस्ट का प्रकाशन और उस पर दावा-आपत्ति के बाद ही प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। लेकिन यहां…
पक्ष – 1 : प्रमोशन की आड़ में नियमों की अनदेखी ? विभाग से जो खबर निकल कर आ रही है, वो चौंकाने वाली है।

बिना सीनियरिटी लिस्ट के प्रमोशन का दबाव :-

केदार गुप्ता के करीबी माने जाने वाले 3-4 अधिकारियों पर आरोप है कि वे अध्यक्ष पर लगातार प्रमोशन के लिए दबाव बना रहे हैं। कई कर्मचारी टकटकी लगाए केदार गुप्ता की ओर देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि केदार गुप्ता ने एक कमेटी तो बना दी है, लेकिन कमेटी के बहाने चंद चहेते लोगों को ही लाभ पहुंचाने की तैयारी है।

वर्ष  2019-20 के कागजों पर 2025 में हस्ताक्षर का जाल :-

सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ अधिकारी ऐसे दस्तावेजों पर केदार गुप्ता से हस्ताक्षर करवाने की फिराक में हैं, जिनका संबंध 2019-20 के कार्यकाल से है। जबकि केदार गुप्ता ने खुद 2025 में पदभार ग्रहण किया है। अगर ऐसा होता है तो यह न सिर्फ नियम विरुद्ध होगा, बल्कि भविष्य में कानूनी पचड़े में अध्यक्ष को फंसाने का षड्यंत्र भी हो सकता है। जानकारों का कहना है कि केदार गुप्ता को इस जाल को समझना होगा।

डबल प्रमोशन का साया:-

कर्मचारियों में आज भी पूर्व अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर के कार्यकाल का जिक्र होता है, जब कथित तौर पर एक ही व्यक्ति को डबल प्रमोशन दे दिया गया था। उस एक फैसले का रोष आज भी बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों में है। अब फिर वही इतिहास दोहराए जाने का डर सता रहा है।

सख्त और निर्णायक अध्यक्ष :-

केदार  गुप्ता – वो अध्यक्ष जिसने पहली बार सिस्टम पर चोट की दूसरी तरफ केदार गुप्ता के समर्थक और बैंक के एक बड़े धड़े का मानना है कि केदार गुप्ता अपेक्स बैंक के इतिहास के सबसे सख्त और निर्णायक अध्यक्ष साबित हुए हैं।

 घोटालों पर पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक: –

अगर अपेक्स बैंक के इतिहास के पन्ने पलटे जाएं तो केदार गुप्ता पहले ऐसे अध्यक्ष हैं जिन्होंने पदभार ग्रहण करते ही घोटालों को रोकने का साहस दिखाया। बर्खास्तगी की कार्रवाई की और EOW तक शिकायत पहुंचाई। आज तक किसी भी अध्यक्ष ने इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं की थी।

अधिकारियों की नहीं, अपनी चलाने वाले अध्यक्ष:-

केदार गुप्ता की सबसे बड़ी ताकत यही है कि उन्हें अपने अधिकार और पावर का पूरा ज्ञान है। वे अधिकारियों की हां में हां मिलाने वाले अध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि अधिकारियों से काम लेना जानते हैं। यही बात अधिकारियों के एक वर्ग को रास नहीं आ रही।

बहकावे से बचना होगा:-

समर्थकों का भी मानना है कि केदार गुप्ता एक ईमानदार छवि के व्यक्ति हैं, लेकिन कई बार वे अधिकारियों के बहकावे में आकर गुमराह हो जाते हैं। प्रमोशन का मामला भी इसी का हिस्सा है। उन्हें चाहिए कि वे पूरी सीनियरिटी लिस्ट सार्वजनिक करें और नियमानुसार पारदर्शी तरीके से प्रमोशन करें, ताकि किसी पर उंगली न उठे।

पारदर्शी तरीके से कार्रवाई :-

संगठन के वरिष्ठ लोगों ने इस मुद्दे को लेकर अपनी चिंता जाहिर की और अध्यक्ष केदार गुप्ता से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया। केदार गुप्ता ने संगठन की बातों को गंभीरता से लिया। उन्होंने कर्मचारियों द्वारा दिए गए अभ्यावेदन का खुद अवलोकन किया और तुरंत संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार, पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। और अध्यक्ष के इसी निर्देश के बाद प्रबंधन ने 4 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया।

कमेटी में कौन-कौन?

• अध्यक्ष: श्री भूपेश चंद्रवंशी, उप महाप्रबंधक
• सदस्य: श्री एल.के. चौधरी, सहायक महाप्रबंधक
• सदस्य: श्री ए.के. लहरे, प्रबंधक
• संयोजक: श्री रीतेश कुमार सोनी, लेखाधिकारी
इस कमेटी को दो बड़े काम दिए गए हैं –
1. क्या 2008 के बाद काम बढ़ने के कारण लेखाधिकारी और सहायक प्रबंधक के नए पद बनाए जाने चाहिए?
2. क्या सीधी भर्ती का कोटा खत्म कर उसे विभागीय प्रमोशन से भरा जाए?

असलियत क्या है?

तो सच्चाई ये है कि अभी तक किसी को कोई प्रमोशन नहीं मिला है। जो कुछ हुआ है, वो सिर्फ और सिर्फ जांच के लिए कमेटी बनी है।

केदार गुप्ता वही अध्यक्ष हैं जिन्होंने आते ही बैंक में सालों से चल रहे घोटालों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी, बर्खास्तगी की थी और EOW में शिकायत की थी। ऐसा आज तक किसी अध्यक्ष ने नहीं किया था।
इसीलिए उनकी परीक्षा और भी बड़ी है। क्या वे सारे दबावों को तोड़कर, सीनियरिटी लिस्ट जारी कर सबको न्याय देंगे? पूरा अपेक्स बैंक इस समय सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहा है ।

निष्कर्ष: :-

अंत में लड़ाई दो विचारधाराओं की है। एक तरफ प्रमोशन की आस में बैठा अधिकारियों का एक ऐसा वर्ग है जो शॉर्टकट से आगे बढ़ना चाहता है, तो दूसरी तरफ एक ऐसा अध्यक्ष जिसने आते ही भ्रष्टाचार पर प्रहार किया है।

अब सबकी निगाहें केदार गुप्ता पर टिकी हैं। क्या वे अधिकारियों के बुने जाल में फंसेंगे या अपने जाने-पहचाने सख्त अंदाज में नियमानुसार, सीनियरिटी के आधार पर सबको न्याय देंगे? अगर उन्होंने चंद लोगों को लाभ पहुंचाया तो यह उनके अब तक के लिए गए साहसिक फैसलों पर पानी फेर देगा। और अगर उन्होंने पारदर्शी फैसला लिया तो वे अपेक्स बैंक में एक नई लकीर खींच देंगे।

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