शह और मात…. बिसात बिछी थी ट्रांसफर की… अपेक्षा व्यास मोहरा…केदार गुप्ता ने चली चाल…

नवा रायपुर 30 अक्टूबर । जिला सहकारी बैंकों में लंबे समय से चल रहा खींचतान का खेल आखिरकार खत्म हो गया। अपेक्स बैंक प्रबंधन ने बड़ा फैसला लेते हुए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर की सीईओ अपेक्षा व्यास को हटाकर बैंक मुख्यालय नवा रायपुर में अटैच कर दिया है। उनके स्थान पर अपेक्स बैंक में डीजीएम के पद पर पदस्थ भूपेश चंद्रवंशी को बैंक का नया सीईओ बनाया गया है। बताया जा रहा है कि श्रीमती व्यास पर आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे।
भ्रष्टाचार का साया :-
अपेक्षा व्यास जनवरी 2024 से रायपुर में पदस्थ थीं, लेकिन उन पर लगा दाग पुराना है। दुर्ग जिला सहकारी बैंक में सीईओ रहते हुए उन पर करीब 250 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई थीं। मामला इतना तूल पकड़ा कि दुर्ग के बीजेपी नेताओं ने खुद सहकारिता मंत्री केदार कश्यप को पत्र लिखकर उन्हें निलंबित कर विस्तृत जांच की मांग की थी। मंत्री के निर्देश पर जांच तो हुई, लेकिन सूत्रों के मुताबिक मामले पर लीपापोती कर दी गई।
हजारों पन्नों के दस्तावेजों पर एक फैसला :-
सूत्रों की मानें तो अपेक्षा व्यास को हटाने के लिए अंदर ही अंदर लगातार मुहिम चल रही थी, लेकिन दिग्गज नेताओं के संरक्षण के चलते उन्हें हटाना मुश्किल हो रहा था। हजारों पेज के दस्तावेज भी उन्हें कुर्सी से हिला नहीं पा रहे थे। सचिव, रजिस्ट्रार और प्रबंधन से लेकर अपेक्स बैंक के प्रशासक और चेयरमैन केदार गुप्ता तक, सभी कहीं न कहीं राजनीतिक दबाव में घिरे नजर आ रहे थे। लेकिन इस बार केदार गुप्ता ने सबको चौंका दिया और सीधे तबादला आदेश जारी कर दिया। और पदभार भूपेश ने 29 अक्टूबर को कर लिया ।
गुप्ता की मास्टर चाल:-
शतरंज की बिसात और केदार गुप्ता की मास्टर चाल
सहकारिता गलियारे में चर्चा है कि केदार गुप्ता को समझ पाना आसान नहीं है। वे शतरंज की बिसात की तरह अपनी चालें बिछाते हैं, जहां सामने वाले खिलाड़ी को अंदाजा ही नहीं लगता कि अगली चाल क्या होगी। एक साल के कार्यकाल में उन्होंने साफ कर दिया है कि कौन अफसर कहां खेलेगा और उसे कहां मात देनी है। इसी रणनीति के तहत उन्होंने भूपेश चंद्रवंशी को राजधानी जैसे हाई-प्रोफाइल जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारी सौंपी है। खुद भूपेश ने भी इस बड़ी जिम्मेदारी की कल्पना नहीं की थी।
संरक्षण की दीवार गिरी, कार्यकर्ताओं की सुनी:-
इस तबादले ने राजधानी के उन बड़े नेताओं के कान खड़े कर दिए हैं, जो अपेक्षा व्यास को संरक्षण दे रहे थे। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के चलते कार्यकर्ताओं की शिकायतों को सुनना जरूरी हो गया है। हाल ही में प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दौरे के दौरान संगठन, विधायक, मंत्री और सांसदों की क्लास लिए जाने की भी चर्चा है, जिसमें अधिकांश ने कहा था कि हमारे काम नहीं होते। इसी बीच केदार गुप्ता ने वो कर दिखाया जिसकी चर्चा हर तरफ है। वैसे भी अपेक्षा की शिकायत काफ़ी संगठनों ने की थी जिसके दस्तावेज़ प्रमाणित है ।
अब भी यकीन नहीं:-
अपेक्षा व्यास के ट्रांसफर आदेश को अब भी कोई यकीन नहीं कर रहा है ख़ासकर जिला सरकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारी -कर्मचारी को यकीन नहीं हो रहा है की वास्तव में अपेक्षा का ट्रांसफर हो गया है । जब भूपेश ने पदभार ग्रहण कर लिया तब भी नहीं । उन्हें लग रहा है की एक फ़ोन केदार को झुका देगा हम भी इस आदेश के बाद तुरंत खबर लगाना मुनासिफ नहीं समझा क्योंकि यह सहकारिता जगत में कोई छोटी बात नहीं थी । इसलिए थोड़ा रुक कर लोगों को टटोल कर यह खबर जारी करना पड़ा ।
अफसर चला रहे हैं सरकार:-
राजनीतिक गलियारे में अक्सर कहा जाता है कि अफसर सरकार चला रहे हैं, लेकिन अपेक्स बैंक में तस्वीर उल्टी है। अफसर अध्यक्षों को खेलते थे, अब अध्यक्ष अफसरों को खेल रहे हैं। अगर प्रदेश के निगम-मंडलों के प्रशासकों का मूल्यांकन हो तो सख्त प्रशासकों की टॉप-12 लिस्ट में केदार गुप्ता का नाम जरूर गिना जाएगा।



