साहित्य सृजनशीलता और संवेदना विषय पर विचारोत्तेजक गोष्टी…

रायपुर, नव-छत्तीसगढ़ साहित्य सांस्कृतिक संस्थान रायपुर के तत्वावधान में वृंदावन हॉल में साहित्य सृजनशीलता और संवेदना विषयों पर एक महत्वपूर्ण तथा सारगर्भित गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य अतिथि शशांक शर्मा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी रायपुर और कार्यक्रम अध्यक्ष चिंतक,लेखक,कवि,स्तंभकार संजीव कुमार ठाकुर थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ माधव दुर्गेश अवस्थी, जगदलपुर बस्तर से पधारी हिंदी अंग्रेजी छत्तीसगढ़ी की लेखिका तथा कवित्री जान्हवी, युवा ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त लेखिका तथा अतिरिक्त संचालक कोष लेखा छत्तीसगढ़ श्रद्धा थवाईत और वरिष्ठ कवित्री श्रीमती शशि सुरेंद्र दुबे थीं। कार्यक्रम दो सत्रों में संचालित किया गया प्रथम सत्र विचार गोष्ठी तथा दूसरा सत्य काव्य पाठ का रखा गया था। सरस्वती वंदना सुषमा पटेल द्वारा की गई, कार्यक्रम का सफल संचालन शशांक खरे और भारती यादव ने किया। कार्यक्रम का संयोजन सुमन शर्मा वाजपेई ने किया। मां सरस्वती के पूजन के पश्चात मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा की संवेदना साहित्य का महत्वपूर्ण अंग है एवं साहित्य की संवेदना विभिन्न काल परिस्थितियों में विभिन्न स्वरूपों में दिखाई देती है किंतु यह तय है कि संवेदना के बिना साहित्य अधूरा है। इस अवसर पर बोलते हुए कार्यक्रम के अध्यक्ष कवि, चिंतक, लेखक संजीव कुमार ठाकुर ने कहा की साहित्य समेकित संवेदना तथा करुणा का संवेदनशील प्रभाव है, साहित्य मूलतः मनुष्य के भीतर धड़कती चेतना की भाषा है। वह केवल मनोरंजन नहीं करता, वह मनुष्य को मनुष्य बनाता है। उन्होंने आगे उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी साहित्य में प्रेमचंद के बिना यह चर्चा अधूरी रह जाएगी- प्रेमचंद ने किसानों, मजदूरों, स्त्रियों और दलितों की पीड़ा को साहित्य में प्रतिष्ठा दी। विशिष्ट अतिथि पूर्व पुलिस महानिदेशक दुर्गेश माधव अवस्थी जी ने कहा साहित्य सृजनशीलता और संवेदना जैसे गंभीर विषय पर विचार विमर्श सुनने इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना साहित्यिक सुचिता को दर्शाता है और साहित्य को संवेदना से यदि मुक्त कर दिया जाए तो साहित्य केवल शब्दों का भंडार रहकर प्रभावहीन हो जाएगा। विशिष्ट अतिथि जाह्नवी पांडे ने हिंदी अंग्रेजी तथा छत्तीसगढ़ी में हिंदी साहित्य में संवेदना की सारगर्भित विवेचना भी की उन्होंने इस अवसर पर संवेदना की कविता भी सुनाई, युवा ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त लेखिका श्रद्धा थवाईत ने कहा साहित्य करुणा संवेदना मर्म और स्नेह का एक समेकित प्रयास है यह मनुष्य के मर्म को जगाने वाली रचनाओं का समूह है खासकर स्त्री चिंतन में संवेदना एवं करुणा का विशेष स्थान है। श्रीमती शशि सुरेंद्र दुबे ने साहित्य के मर्म और उसकी संवेदना की गहराईयां की बात की।
इस अवसर पर डॉक्टर स्मिता शुक्ला अवस्थी, बस्तर से पधारी (आईजी,पी सुंदर राज की धर्मपत्नी) श्रीमती रम्या पी सुंदर राज, पूर्व आईजी पी एन तिवारी चंद्रकांत पांडे सुरेंद्र रावल डॉक्टर सुरेश तिवारी,के पी सक्सेना शारदेन्दु झा,अनिता झा विशेष रूप से उपस्थित थे। दूसरे सत्र काव्य गोष्ठी का संचालन भारती यादव ने किया इस अवसर पर कवित्री रंजीता शर्मा,शकुंतला तिवारी, मीनाक्षी बाजपेई, सीमा पांडे, सीमा निगम मृणालिक ओझा,राजेन्द्र ओझा,उत्तम लहरे, सुषमा पटेल, सुनील पांडे, साधना कसार, मयूराक्षी मिश्रा,माहेश्वर पांडे, विपुल तिवारी,महेश पालीवाल यशवंत यदु, यशवंत चतुर्वेदी, डॉक्टर सीमा प्रधान, ऋषभदेव साहू,डॉ मीता अग्रवाल, सुमन शर्मा, विवेक राहतगंवकर, कल्याणी तिवारी,मोहम्मद हुसैन,आशुतोष वर्मा,वीरेंद्र शर्मा, भूपेंद्र शर्मा, कवियों ने काव्य पाठ किया. आभार प्रदर्शन समाजसेवी डॉ उदय भान सिंह चौहान ने कियाl




