छत्तीसगढ़

अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट सर्जरी विभाग में लगातार पांचवीं बार… हृदय की अति दुर्लभ बीमारी एब्स्टीन एनॉमली का सफल ऑपरेशन…

.रायपुर l डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट स्थित हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में 36 वर्षीय महिला की दुर्लभ हृदय रोग एब्स्टीन एनॉमली का 5वीं बार सफल ऑपरेशन करके विभाग ने एक बार फिर एब्स्टीन एनॉमली के सर्वाधिक ऑपरेशन करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। यह ऑपरेशन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बहुत ही दुर्लभ हृदय की बीमारी है। इतना दुर्लभ होते हुए भी इस संस्थान में लगातार 5 सफल ऑपरेशन हो चुके हैं जो राज्य के किसी भी संस्थान में सर्वाधिक है।

महिला पूरी तरह से स्वस्थ :-

हार्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू बताते हैं कि इस बीमारी का ऑपरेशन बहुत ही जटिल है एवं इस ऑपरेशन की सफलता दर 10 प्रतिशत से भी कम है। 50 प्रतिशत मरीजों में परमानेंट पेसमेकर की आवश्यकता पड़ जाती है। ऑपरेशन के बाद महिला मरीज पूर्णतः स्वस्थ्य होकर अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाली है एवं इसको परमानेंट पेसमेकर की आवश्यकता नहीं पड़ी।

सांस फूलने तेज धड़कन की शिकायत :-

डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, मरीज को कुछ सालों से सांस फूलने एवं अत्यधिक तेज धड़कन की शिकायत थी। कई बार यह बेहोश भी हो जाती थी। सामान्यतः एब्स्टीन एनॉमली के 13 प्रतिशत मरीज जन्म लेते ही मर जाते हैं एवं 18 प्रतिशत मरीज 10 साल की उम्र एवं 25 से 30 साल की औसत उम्र तक ही जीवित रह पाते हैं।

क्या होता है एब्स्टीन एनॉमली:-

जब बच्चा मां के पेट के अंदर होता है तो प्रथम 6 माह में हृदय विकसित होता है परंतु किसी कारणवश जैसे कि गर्भावस्था के दौरान लीथियम या ट्रेटिनोइक एसिड के सेवन से हृदय का विकास सही ढंग से नहीं हो पाता। उस स्थिति में हृदय का ट्राइकस्पिड वाल्व ठीक से नहीं बन पाता एवं यह वाल्व राइट वेंट्रीकल की ओर नीचे चले जाता है जिससे राइट वेंट्रीकल भी ठीक से नहीं बन पाता है जिसको एट्रियालाइजेशन ऑफ राइट वेंट्रीकल कहा जाता है। इस बीमारी में मृत्यु का कारण हार्ट फेल्योर या फिर अनियंत्रित धड़कन होता है।

ऐसे हुआ ऑपरेशन:-

इस ऑपरेशन में ओपन हार्ट सर्जरी करके हार्ट लंग मशीन की सहायता से हृदय एवं फेफड़े के कार्य को रोका गया एवं खराब ट्राइकस्पिड वाल्व की जगह में नये बोवाइन टिश्यू वाल्व को लगाया गया एवं इन्ट्राकार्डियक रिपेयर किया गया। टिश्यू वाल्व लगाने का फायदा यह है कि मरीज को जीवनभर खून पतला करने की दवा (एसीट्राम या वारफेरिन) खाने की जरूरत नहीं होती। यह ऑपरेशन शहीद वीरनारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजनांतर्गत निशुल्क हुआ।

सामग्री की सप्लाई नहीं इसलिए विलंब :-

यह ऑपरेशन इसलिए भी अहम है क्योंकि इस विभाग में पिछले कुछ दिनों से ऑपरेशन के लिए जरूरी सामग्री की सप्लाई नहीं होने के कारण ऑपरेशन में थोड़ा विलंब हो रहा था। महीने के अंतिम सप्ताह में ऑपरेशन सामग्री उपलब्ध होते ही 4 ओपन हार्ट सर्जरी हो चुके हैं।

सभी ऑपरेशन संभव :-

डीन डॉ. विवेक चौधरी और अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर के सतत प्रयासों से ये सभी ऑपरेशन संभव हो पाये। इन्होंने ऑपरेशन में हो रहे विलंब को देखते हुए समस्याओं का त्वरित निराकरण कर अस्पताल में भर्ती मरीजों की सुविधा का ध्यान रखते हुए ऑपरेशन को संभव बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया

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