अब सफर भी हुआ महंगा…बस किराए में बेतहाशा वृद्धि…भड़के पूर्व विधायक चंद्राकर…

महासमुंद 16 अक्टूबर । पूर्व संसदीय सचिव छत्तीसगढ़ शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार को जनविरोधी व तानाशाह बताते हुए कहा कि आम आदमी के पास अब ऐसा कुछ नहीं बचा जिससे वे राहत की सांस ले सके।
वसूली जनता की जेब से :-
चंद्राकर ने कहा कि डीजल, पेट्रोल से लेकर खाद्य सामग्रियों में महंगाई से त्रस्त आम आदमी का सफर भी अब महंगा कर दिया गया है। यह सरकार जनता को राहत देने के बजाय सारी चीजों की वसूली जनता की जेब से कर रही है।
नई दरें राजपत्र में प्रकाशन :-
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा जारी नई किराया दरें महासमुंद सहित पूरे प्रदेश के आम यात्रियों की जेब पर सीधा बोझ हैं। परिवहन विभाग की अधिसूचना 8 अक्टूबर 2026 के अनुसार नई दरें राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू हो गई हैं।
किराया दरें इस प्रकार हैं:-
• साधारण बस: पहले 5 किलोमीटर के लिए 10 रुपये और उसके बाद 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर।
डीलक्स बस: पहले 5 किमी के लिए 12 रुपये और उसके बाद 2.20 रुपये प्रति किलोमीटर।
सुपर लग्जरी (वोल्वो, स्केनिया): पहले 5 किमी के लिए 12 रुपये और उसके बाद 3.30 रुपये प्रति किलोमीटर।
रात्रिकालीन सेवा में 10 प्रतिशत अतिरिक्त किराया वसूला जाएगा।
महासमुंद जिले में ज्यादा असर:-
इस वृद्धि का सबसे ज्यादा असर महासमुंद जिले के यात्रियों पर पड़ेगा। महासमुंद से रायपुर, रायपुर से सरायपाली, महासमुंद से सरायपाली, बागबाहरा, खरियार रोड, बलौदाबाजार, राजिम, छुरा और गरियाबंद जाने वाले यात्रियों का सफर लगभग डेढ़ गुना महंगा हो जाएगा।
गरीब और मध्यम वर्ग :-
पहले जो किराया 100 से 150 रुपये में हो जाता था, अब उसी के लिए 200 से 250 रुपये तक देने पड़ेंगे। सुपर लग्जरी और स्लीपर बसों में तो यह बोझ और भी ज्यादा है। रोजाना मजदूरी, पढ़ाई, नौकरी और इलाज के लिए सफर करने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह वृद्धि असहनीय है।
यात्रियों और मजदूरों को :-
चंद्राकर ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, खाद्य सामग्रियों के बाद अब बस किराया बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी की कमर तोड़ने का काम किया है। पूरा प्रदेश इस जनविरोधी फैसले का विरोध कर रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए इस बढ़ोतरी को तुरंत वापस लिया जाए, ताकि रोजाना सफर करने वाले आम यात्रियों और मजदूरों को राहत मिल सके।



