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नोनी हर स्कूल पढ़े ला जाए…

”सुषमा के स्नेहिल सृजन”
अँगना
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*अँगना द्वारी गोबर लिपाय।*
*जाड़ महीना अड़बड़ सताय।।*
*बबा अँगेठी तापे बुलाय।*
*बड़े बिहनियाँ आगी जलाय।।*
*सुघ्घर रोटी ‘सुषमा’ बनाय।*
*चटनी संग म भारी मिठाय।।*
*मिरचा धनिया डार महकाय।*
*देख सबो झन लार टपकाय।।*
*लइका पिचका कैसे नुहाय।*
*जाड़ म काँपे दाँत ल बजाय।।*
*नदिया नरवा ह उछलत जाय।*
*झरझर झरना हिरदे लुभाय।।*
*खटिया म दाई बरी बनाय।*
*मुनगा संग म झोर रंधाय।।*
*खेल-कूद म कभो नी भुलाय।*
*नोनी हर स्कूल पढ़े ल जाय।।*
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