लोकप्रियता के नशे में मर्यादा भूले बागेश्वर सरकार…राम को अपना…कृष्ण को पराया…सनातन का अपमान – रमेश यदु

रायपुर 2 नवंबर । बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण पर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी से सर्व यादव समाज छत्तीसगढ़ में जबरदस्त आक्रोश है। समाज के प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है – भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों हमारे आराध्य हैं, लोकप्रियता के अहंकार में अपनी मर्यादा मत भूलिए धीरेंद्र शास्त्री जी।
यदु ने कहा, धार्मिक मंच कोई मनोरंजन का मंच नहीं है। संत को अपनी वाणी, भाषा और मर्यादा का सौ बार ध्यान रखना चाहिए। आप देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, आपकी एक बात का समाज पर गहरा असर पड़ता है। ऐसे में मंच से ये कहना कि “श्रीराम हमारे और श्रीकृष्ण तुम्हारे” – यह न केवल अनुचित है, बल्कि सनातन को बांटने वाली सोच है। भगवान किसी जाति, वर्ग या पंडाल की जागीर नहीं हैं, वे समस्त मानवता के आराध्य हैं।
“टेढ़ा-मेढ़ा” शब्द पर घोर आपत्ति :-
प्रदेश अध्यक्ष ने सबसे कड़ी आपत्ति भगवान के स्वरूप के लिए “टेढ़ा-मेढ़ा” जैसे शब्दों के प्रयोग पर जताई। उन्होंने कहा, जिस योगेश्वर कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का ज्ञान देकर पूरी मानवता को कर्म और धर्म का मार्ग दिखाया, जिसके जीवन में प्रेम भी है, नीति भी है, न्याय भी है और लोककल्याण भी है, उनके लिए ऐसी भाषा बोलना करोड़ों यादवों ही नहीं, करोड़ों सनातनियों की आस्था पर सीधा प्रहार है।
फूट डालने का अधिकार नहीं :-
रमेश ने दो टूक कहा – श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं तो श्रीकृष्ण योगेश्वर हैं, लीलाधर हैं। दोनों में भेद कैसा? हम यादव समाज के लोग कृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं तो राम के प्रति भी उतना ही शीश झुकाते हैं। किसी कथावाचक को अपनी निजी पसंद के चलते हमारे आराध्यों में फूट डालने का कोई अधिकार नहीं है।
देश पहले ही जात-पात और ऊंच-नीच से जूझ रहा है। ऐसे में धर्म के मंच से जोड़ने की बात होनी चाहिए, तोड़ने की नहीं। संत का धर्म समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता का बीज बोना है, विवाद का नहीं।
चेतावनी और मांग :-
उन्होंने ने यह भी कहा, कि लोकप्रियता किसी को भी दूसरों की आस्था को रौंदने का लाइसेंस नहीं देती। हम धीरेंद्र शास्त्री जी से मांग करते हैं कि वे अपनी कथित टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दें और समस्त संत समाज, यादव समाज और सनातन धर्मावलंबियों से हाथ जोड़कर सार्वजनिक माफी मांगें।



