स्कूलों टूटे हैं, फंड लूटा है! 690 करोड़ का शिक्षा घोटाला…रेलवे का सौतेला व्यवहार…माल को मुनाफा, आम आदमी को धोखा…

रायपुर् । छत्तीसगढ़ से जुड़े तीन बड़े मामलों में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिले दस्तावेजों ने रेलवे, NHAI और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर द्वारा प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर यह खुलासा हुआ है।
मामला 1: मालगाड़ी से मुनाफा, पैसेंजर से किनारा :-
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने RTI के जवाब में स्वीकार किया है कि उसने मालगाड़ियों के परिचालन से ₹30,410 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है। वहीं दूसरी ओर आम जनता की पैसेंजर, मेमू और एक्सप्रेस ट्रेनों को लगातार रद्द किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि रेलवे ने लिखित में माना है कि रद्द ट्रेनों से प्रभावित होने वाले दैनिक यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था नहीं की गई है। अधिवक्ता ठाकुर ने इसे “रेलवे का सौतेला व्यवहार” बताते हुए कहा कि रेलवे माल ढुलाई को प्राथमिकता देकर आम यात्रियों को बेसहारा छोड़ रहा है।
मामला 2: टोल वसूली 100%, सुरक्षा 0% :-
रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे NH-130 (100+ किमी) पर टोल वसूली और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर RTI में बड़ा खुलासा हुआ है। NHAI ने जवाब में बताया है कि इस पूरे हाईवे पर केवल 2 एम्बुलेंस पॉइंट मौजूद हैं। वहीं हाइवे पर तैनात ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों और संबद्ध अस्पतालों का कोई रिकॉर्ड ही विभाग के पास मौजूद नहीं है। प्रथम अपील दायर करने के बाद भी अधिकारियों ने इस पर चुप्पी साध ली। अधिवक्ता का सवाल है – “जब NHAI 100% टोल वसूल रहा है, तो जान बचाने का इंतजाम 0% क्यों है?”
मामला 3: समग्र शिक्षा 690 करोड़ फंड पड़ा रहा, स्कूल जर्जर
तीसरा मामला प्रदेश के लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। RTI से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र से प्राप्त ₹690 करोड़ से अधिक की राशि विभाग दो वर्षों में खर्च ही नहीं कर पाया। इतना ही नहीं, वर्ष 2025-26 के लिए प्राप्त ₹993 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) भी केंद्र सरकार को नहीं भेजा गया है। जबकि प्रदेश में सैकड़ों स्कूल जर्जर हालत में हैं और शिक्षकों की भारी कमी है। ठाकुर ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।





