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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक…. 2026 का बंगाली समाज ने किया समर्थन…

   रायपुर  l छत्तीसगढ़ में पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को लेकर बंगाली समाज ने भी अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सामाजिक संतुलन, सांस्कृतिक संरक्षण और वास्तविक धार्मिक स्वातंत्र्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। राजधानी रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में छत्तीसगढ़ बंगाली समाज के प्रतिनिधियों ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा तथा धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाएगा।

छत्तीसगढ़ बंग समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष शिव दत्ता और महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रूमा सेनगुप्ता ने संयुक्त रूप से कहा कि वर्तमान समय में समाज के विभिन्न वर्गों में जागरूकता का अभाव होने के कारण कई बार लोग भ्रम या प्रलोभन में आकर ऐसे निर्णय ले लेते हैं, जो बाद में उनके सामाजिक और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में यह विधेयक लोगों को सही दिशा देने और उनके अधिकारों की रक्षा करने का कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि यह कानून किसी भी धर्म या आस्था के विरोध में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था चुनने का पूर्ण स्वातंत्र्य प्राप्त हो और उस पर किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव न डाला जाए। इस दृष्टि से यह विधेयक समाज में पारदर्शिता, विश्वास और संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त पहल है।

समाज के प्रतिनिधियों ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी विविधता, सांस्कृतिक समृद्धि और आपसी सद्भाव में निहित है। ऐसे में किसी भी प्रकार की असंतुलित या दबावपूर्ण गतिविधियाँ इस समरसता को प्रभावित कर सकती हैं। यह विधेयक उन परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिससे समाज में स्थिरता और सौहार्द बना रहेगा।

शिव दत्ता और रूमा सेनगुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में समाज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस कानून की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और किसी भी प्रकार के भ्रम से बच सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ में सामाजिक समरसता और अधिक सुदृढ़ होगी तथा सभी वर्गों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना को बल मिलेगा।

अंत में बंगाली समाज के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कानून व्यक्तिगत स्वातंत्र्य और सामाजिक स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो प्रदेश के समग्र विकास और सामाजिक एकता को मजबूती प्रदान करेगा।

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