Breaking News

डर पर विजय का मंत्र… श्री श्री विश्वविद्यालय में साहित्य संवाद… सेना के अनुभवों से छात्रों को मिली प्रेरणा…

रायपुर, 10 मार्च l एक बार मुझे लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किए जाने के अवसर पर निर्वाचन आयोग के कैबिनेट सचिव टी. एस. सुब्रमण्यम ने मुझसे पूछा था, मेजर बख्शी, आपने इतने वर्षों तक देश की सेवा की है, आपके जीवन की सबसे बड़ी घटना कौन-सी है ? इसके उत्तर में मैंने कहा था, ‘मेरा जीवित रहना ही मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। क्योंकि मैंने अपने जीवन में जिन अनेक युद्धों का सामना किया, उनमें अपने सैनिकों की मृत्यु को बहुत करीब से देखा है। ऐसे में मेरा जीवित रह जाना ही मेरे जीवन की सबसे बड़ी घटना है।

जीवन के अभियानों का किया उल्लेख :-

यह बात भारतीय थलसेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल जी. डी. बख्शी ने ओड़िशा के कटकस्थित श्री श्री विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्रेरणा के पर्व ‘साहित्य संवाद’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। भगवद्गीता की जीवन्त शिक्षाओं को उदाहरणों के साथ समझाते हुए उन्होंने अपने जीवन के सभी साहसिक अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन अनुभवों, अनुभूतियों, दर्शन और शिक्षाओं के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही यह भी प्रेरणादायक रूप से समझाया कि भय पर कैसे विजय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने 1971 के युद्ध का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके सहकर्मी सेकंड लेफ्टिनेंट महेंद्र प्रताप सिंह को पाकिस्तानी सेना ने किस प्रकार अत्यंत पीड़ादायक मृत्यु दी थी। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना का वर्णन भी उन्होंने किया।

पाकिस्तानी सैनिकों को बनाया बंदी :-

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इसके जवाब में भारत ने किस प्रकार 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बना लिया था। श्री श्री विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस पूरे दिन चलने वाले कार्यक्रम में अंग्रेज़ी साहित्यकार एवं कॉर्पोरेट व्यक्तित्व संजीव सरीन, कुलाध्यक्षा प्रोफेसर रजिता कुलकर्णी, आर्ट ऑफ लिविंग के WWCC कार्यक्रम की चेयरपर्सन भानुमति नरसिम्हन, ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता ओड़िया साहित्यकार पद्मभूषण डॉ. प्रतिभा राय, विशिष्ट अनुवादक, आलोचक एवं स्तंभकार प्रोफेसर यतीन्द्र नायक, प्रसिद्ध उपन्यासकार एवं साहित्यकार गौरहरि दास, बैंकर मिहिर पटनायक, जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता डॉ. पीताबास राउतराय तथा प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता सत्यव्रत (कुना) त्रिपाठी प्रमुख विभिन्न सत्रों में उपस्थित रहे और अपने विचारों से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों को प्रेरित किया। सबसे पहले एडमिन अधिकारी सौरभ बावेजा ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि कुलपति डॉ. तेजप्रताप ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम की शुरुआत ओडिशी नृत्य ‘दशावतारम्’ से हुई।

400 से अधिक दर्शक रहें शामिल :-

इस कार्यक्रम में लगभग 400 से अधिक दर्शक उपस्थित थे। विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. बिप्लब बिश्वाल, डॉ. भरत दाश, डॉ. केशरी सिंह, डॉ. मधुमिता दास, डॉ. राकेश त्रिपाठी और डॉ. डी. डी. स्वाईं ने विभिन्न सत्रों का संचालन किया। कार्यक्रम की सफलता के लिए कुलपति प्रोफेसर डॉ. तेजप्रताप, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा, कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य, छात्र कल्याण विभाग के डीन प्रोफेसर डॉ. जयप्रकाश भट्ट तथा मानव संसाधन विभाग के उपनिदेशक ज्योतिरंजन गड़नायक ने आयोजकों को धन्यवाद दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button