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छंद-जलहरण घनाक्षरी…

 

*चम्पारण्य*

 

आध्यात्मिक शुभ धाम, चम्पारण देव ग्राम,

दर्शन देते हैं नाथ,

*शिव प्रभु चम्पेश्वर।*

 

कामना हो पूर्ण जहाँ, श्रद्धालु आते हैं वहाँ,

जपते हैं शिव-शिव,

*महादेव हर-हर।*

 

शिव शीश धारे नीर, हर लेते सारे पीर,

“सुषमा”आशीष मिले,

*बम-बम बोल कर।*

 

आँक समी बेलपत्र, धतूरा कनेर पुष्प,

श्रद्धा भाव लिए डाले,

*एक लोटा जल भर।*(१)

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आकर्षण केन्द्र बिन्दु, बैठकी वल्लभाचार्य,

चम्पारण धरा धाम,

*आते यहाँ नारी-नर।*

 

पुष्टिमार्ग प्रवर्तक, संप्रदाय सुधारक,

‘सुषमा’ प्रसिद्ध प्रेम,

*राधे कृष्ण है अमर।*

 

चंपारण्य पुण्य ग्राम, रायपुर मध्यप्रांत,

वनांचल बीच बसा,

*ध्वज उड़े फर-फर।*

 

भारतीय दार्शनिक, हिंदू संत जन्मस्थली।*

भव्यता से परिपूर्ण,

*प्रकृति है मनहर।*(२)

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