OBC की गिनती पर खेल? अलग कॉलम नहीं तो जाति जनगणना का क्या मतलब – केंद्र पर गरजे विनोद चंद्राकर

महासमुंद। केंद्र की मोदी सरकार ने जनगणना-2027 में जातिगत गणना को शामिल करने का फैसला तो ले लिया, लेकिन इस फैसले में ही बड़ा झोल नजर आ रहा है। जाति तो पूछी जाएगी, पर OBC के लिए अलग और स्पष्ट कॉलम ही नहीं है। इस पर महासमुंद के पूर्व विधायक और पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने केंद्र की नीयत पर सीधा हमला बोला है।
चंद्राकर ने कहा कि सिर्फ जाति पूछ लेना न्याय नहीं है। अगर OBC के लिए पृथक और स्पष्ट वर्गीकरण की व्यवस्था नहीं होगी, तो पिछड़े समाज की असली आबादी का सही आंकड़ा कैसे सामने आएगा?
उन्होंने कहा, “भारत जैसे विशाल देश में सैकड़ों जातियां, उपजातियां और उनके स्थानीय नाम हैं। ऐसे में वैज्ञानिक वर्गीकरण के बिना जातिगत आंकड़े उलझ कर रह जाएंगे। जब सरकार खुद जातिगत डेटा जुटा रही है तो OBC की स्पष्ट पहचान से परहेज क्यों? इसका जवाब केंद्र को पिछड़े वर्गों को देना होगा।”
पूर्व विधायक ने कहा कि OBC को सिर्फ चुनाव में याद करना अब नहीं चलेगा। आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में हक और हिस्सेदारी तय करने के लिए हर वर्ग की वास्तविक जनसंख्या पता होना जरूरी है। बिना स्पष्ट आंकड़ों के सामाजिक न्याय की नीतियां प्रभावी नहीं हो सकतीं।
चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लंबे समय से “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” की मांग के साथ जातिगत जनगणना की लड़ाई लड़ रहे हैं। केंद्र की जिम्मेदारी है कि इसे पूरी पारदर्शिता और वैज्ञानिक तरीके से कराए।
केंद्र सरकार से मांग करते हुए चंद्राकर ने कहा कि जनगणना-2027 में OBC की स्पष्ट, पृथक और वैज्ञानिक पहचान के लिए जरूरी प्रावधान किए जाएं।
“OBC समाज अब सिर्फ वोट बैंक नहीं है, वो अपने अधिकार, सम्मान और हिस्सेदारी का हिसाब चाहता है। केंद्र सरकार को इस मांग से बचना नहीं चाहिए, बल्कि स्पष्ट जवाब देना चाहिए।”



