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आधी रात को जागा यादव प्रेम! दिन भर बेखबर रहे शिक्षा मंत्री…, गजेंद्र की फोटो पॉलिटिक्स…जनमाष्टमी के आदेश पर क्रेडिट का खेल…

रायपुर  3 सितंबर  । श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस और मांस बिक्री पर रोक का जो ऐतिहासिक आदेश आया है, उसकी असली कहानी बिल्कुल अलग है।

भावना से जुड़ा मुद्दा :-

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इस मांग को सबसे पहले मजबूती से उठाया था यादव समाज के संरक्षक, पूर्व सांसद और वर्तमान महापौर मधुसूदन यादव ने। उन्होंने स्पष्ट मांग की थी कि जन्माष्टमी के अवसर पर सारे शराब दुकान बंद रहें और मांस-मटन की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगे। यह केवल धार्मिक मांग नहीं, बल्कि सनातन आस्था और यादव समाज की भावना से जुड़ा मुद्दा था।

तत्काल प्रभाव से आदेश जारी :

मधुसूदन यादव की इस मांग का तत्काल समर्थन किया सर्व यादव समाज के प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु  दोनों ने मिलकर लगभग एक महीना पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर जनभावनाओं से अवगत कराया। इसी मांग पर सरकार ने तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर दिया।

आदेश के बाद नींद से जागे शिक्षा मंत्री!

हैरानी की बात यह है कि जब तक यह आदेश जारी नहीं हुआ और खबरें सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हुईं, तब तक प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को इसकी कोई जानकारी ही नहीं थी। दोपहर-शाम तक वे पूरी तरह बेखबर रहे। जब देखा कि पूरे यादव समाज में मधुसूदन यादव और रमेश यदु की वाहवाही हो रही है, तो रात करीब 11.16  बजे शासकीय pro   के माध्यम  से विज्ञप्ति और एक फोटो जारी कर यह बताने की कोशिश की गई कि यह आदेश तो उन्होंने ही जारी करवाया है।

यही से सवाल उठता है – अगर सच में समाज के साथ थे, तो मांग कहां थी?  पत्र कहां था?

अलग-थलग कर दिया :-

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात स्पष्ट हो गई है कि गजेंद्र यादव को यादव समाज के एक बड़े धड़े ने पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया है। चर्चा है कि ऊंचे राजनीतिक पद पर पहुंचने के बाद वे समाज को ही अनदेखा करने लगे हैं, जबकि उन्हें समाज को मजबूत करना चाहिए था।  समर्थकों में भी भारी निराशा है। लोगों का साफ कहना है – पिता के कंधे पर पैर रखकर राजनीति करने वाला कभी आगे नहीं बढ़ सकता। अगर राजनीति में आगे बढ़ना है तो सबसे पहले अपने समाज को मजबूत करना होगा, आम जनता के मुद्दों को हल करना होगा।

राजनीति से समाज मजबूत होगा या काम से?

सरकार ने उन्हें शिक्षा जैसा अहम विभाग दिया है। जरूरत है उस विभाग को मजबूत करने की, स्कूलों की स्थिति सुधारने की, न कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में उलझकर अपनी झोली भरने की। आज यादव समाज पूछ रहा है – श्रेय की राजनीति से समाज मजबूत होगा या काम से?

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