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खैरागढ़ के इको कैंप में…बर्डवॉक बना आकर्षण का केंद्र…

रायपुर I वन विभाग खैरागढ़ द्वारा ईको कैंप छिंदारी में शुरू की गई ‘बर्डवॉक’ पहल प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह पहल वन मंत्री श्री केदार कश्यप की प्रेरणा और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। वर्ष 2026 से प्रारंभ इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को विशेषज्ञों की देखरेख में पक्षी भ्रमण (बर्डवॉक) आयोजित किया जा रहा है। इसमें आम नागरिकों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों को भाग लेने का अवसर मिल रहा है।

उल्लेखनीय है कि ईको कैंप छिंदारी जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है, जहां छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली पक्षियों की लगभग 35 प्रतिशत प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं। यहां आने वाले पर्यटक विभिन्न रंग-बिरंगे पक्षियों को नजदीक से देखकर मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। हाल के बर्डवॉक कार्यक्रमों में खैरागढ़ के संगीत एवं कला के छात्र- छात्राओं सहित दुर्ग, रायपुर और राजनांदगांव से आए पर्यटकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों को पक्षियों के व्यवहार, घोंसला निर्माण और उनके प्राकृतिक आवास के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह पहल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की सीख भी देती है। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को शांत रहने, प्लास्टिक का उपयोग न करने और वन्यजीवों के आवास का सम्मान करने जैसे नियमों का पालन कराया जाता है।

पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए वयस्कों से 200 रुपए तथा विद्यार्थियों से 50 रुपए का सहयोग शुल्क निर्धारित किया गया है। ईको कैंप का संचालन स्थानीय समुदाय द्वारा किया जा रहा है, जिसे वन विभाग का वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्राप्त है। ईको कैंप छिंदारी में बर्डवॉक के साथ-साथ बोटिंग, टेंटिंग, कैंपिंग तथा छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों जैसे फरा, ठेठरी और खुरमी का आनंद लेने की भी सुविधा उपलब्ध है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थल पर्यटकों के लिए एक आदर्श पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।

वन विभाग ने इच्छुक नागरिकों से बर्डवॉक में शामिल होने के लिए अग्रिम पंजीकरण कराने का आग्रह किया है, ताकि सभी को सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण अनुभव मिल सके। यह पहल इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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