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आयुर्वेद बना संजीवनी… शुगर , बीपी, मोटापा तक में मिला राहत का रास्ता…

रायपुर, । बदलते दौर में लोग मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (बीपी), सर्वाइकल पेन, स्पोंडिलाइटिस, माइग्रेन, एलर्जी, मोटापा, एनीमिया, बाल झड़ना, तनाव और पाचन संबंधी समस्याओं जैसी अनेक बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में आयुर्वेद एक बार फिर भरोसे का मजबूत आधार बनकर उभर रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के आयुष विभाग द्वारा रायगढ़ जिले के आयुष अस्पतालों में जटिल से जटिल रोगों का निःशुल्क और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे कई मरीजों का जीवन फिर से सामान्य और खुशहाल हो रहा है।

इस सफलता के पीछे आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी लोईग में पदस्थ डॉ. माकेश्वरी संभाकर जोशी प्रभारी आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, आयुष केंद्र लोईग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके मार्गदर्शन और सतत देखरेख में इन मरीजों का उपचार किया गया, जहां औषधियों के साथ-साथ आहार-विहार और दिनचर्या पर विशेष ध्यान दिया गया। जानकारी के अभाव में जहां कई लोग महंगे इलाज में समय और पैसा गंवा देते हैं, वहीं जागरूक मरीज आयुर्वेद के इस निःशुल्क उपचार का लाभ लेकर बेहतर स्वास्थ्य की ओर लौट रहे हैं। ऐसे ही छह मरीजों की कहानियां आज उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई हैं।
इस संबंध में प्रभारी आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी लोईग के डॉ. माकेश्वरी संभाकर जोशी ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि जीवनशैली को संतुलित करने की एक संपूर्ण पद्धति है। यदि मरीज नियमित रूप से आहार-विहार और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करें, तो जटिल से जटिल रोगों में भी सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध है, जिसका अधिक से अधिक लोगों को लाभ लेना चाहिए।

खुशहाल जीवन में लौट आए है :-

ग्राम लोईग की 78 वर्षीय लुवा सारथी पिछले दो वर्षों से मधुमेह और उच्च रक्तचाप से परेशान थीं। हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्हें चलने-फिरने में भी कठिनाई होने लगी थी। आयुर्वेदिक उपचार और नियमित दिनचर्या के पालन से जहां उनका शुगर स्तर 390 से घटकर 170-180 तक पहुंच गया, वहीं बीपी भी 170-180 से घटकर 130/70 तक नियंत्रित हो गया। विशेष बात यह रही कि उन्होंने दो महीने पहले से एलोपैथी दवाओं का उपयोग भी बंद कर दिया है।

इसी तरह गौवर्धनपुर के 38 वर्षीय गनपत उरांव सर्वाइकल पेन, स्पोंडिलाइटिस और मधुमेह से पीड़ित थे। लंबे समय तक एलोपैथी उपचार के बावजूद राहत नहीं मिली और सर्जरी की सलाह दी गई थी। लेकिन आयुर्वेदिक उपचार, पंचकर्म और संतुलित दिनचर्या अपनाने से उन्हें 70 प्रतिशत तक सुधार हुआ। अब वे बिना सर्जरी के सामान्य जीवन जी पा रहे हैं।

ग्राम रेगड़ा के 30 वर्षीय यासिम हुसैन का वजन काफी कम था, जिससे वे शारीरिक कमजोरी से जूझ रहे थे। आयुर्वेदिक औषधियों और सही आहार-विहार के पालन से मात्र दो माह में उनका वजन 49 किलो से बढ़कर 60 किलो हो गया।

रायगढ़ के बंटी मेहर, जो सिरदर्द और कमजोरी से परेशान थे, ने भी आयुर्वेदिक उपचार से दो महीने में 8 किलो वजन बढ़ाया और स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार पाया।
ममता जोशी (43 वर्ष) के मामले में आयुर्वेद ने और भी व्यापक प्रभाव दिखाया। बाल झड़ना, एसिडिटी, एनीमिया और मोटापे जैसी समस्याओं से जूझ रही ममता का वजन 90 किलो से घटकर 76 किलो हो गया। साथ ही बाल झड़ना बंद हुआ, हीमोग्लोबिन स्तर 13 ग्राम तक पहुंचा और लंबे समय से अनियमित मासिक धर्म भी फिर से नियमित हो गया।
वहीं 37 वर्षीय बी. डड़सेना, जो पिछले 8-9 वर्षों से एलर्जी, क्रॉनिक सर्दी, माइग्रेन और तनाव से पीड़ित थे, उन्हें भी आयुर्वेदिक उपचार से लगभग 70 प्रतिशत तक राहत मिली।

इन सभी उदाहरणों से हम यह कह सकते है कि आयुर्वेद न केवल रोगों का उपचार करता है, बल्कि जीवनशैली में सुधार लाकर व्यक्ति को संपूर्ण रूप से स्वस्थ बनाने का कार्य करता है। रायगढ़ के आयुष अस्पताल में उपलब्ध यह निःशुल्क उपचार उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो बिना अधिक खर्च के बेहतर स्वास्थ्य की तलाश में हैं।

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