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मैट्स यूनिवर्सिटी में … द नेक्स्ट जनरेशन ऑफ इन्वेस्टिगेशन’…दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आगाज़…

रायपुर (आरंग) I उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी और नैक (NAAC) ‘A+’ ग्रेड प्राप्त मैट्स यूनिवर्सिटी के आरंग कैंपस स्थित ‘डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेंसिक साइंस’ द्वारा आज से दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबिनार की भव्य शुरुआत की गई। इस वेबिनार का मुख्य विषय द नेक्स्ट जनरेशन ऑफ इन्वेस्टिगेशन: एआई, फॉरेंसिक साइंस, साइबर फॉरेंसिक एंड फ्रॉड प्रिवेंशन I

आधुनिक युग में बढ़ते डिजिटल अपराधों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका और नई जांच तकनीकों पर केंद्रित इस राष्ट्रीय वेबिनार में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और विषय-विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।
तकनीकी सत्रों में देश के दिग्गज विशेषज्ञ दे रहे हैं मार्गदर्शन
दो दिनों तक चलने वाले इस ऑनलाइन वेबिनार (ज़ूम प्लेटफॉर्म पर आयोजित) में फॉरेंसिक और साइबर सुरक्षा जगत के कई प्रमुख नाम बतौर रिसोर्स पर्सन शामिल हो रहे हैं:
डॉ. अनूप ए. कुडतरकर (पोस्ट-डॉक)
एक्सटर्नल चीफ एडवाइजर, फीनिक्स स्क्रीनिंग सर्विसेज, बैंगलोर (औद्योगिक विशेषज्ञ)।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद पवार:
असिस्टेंट प्रोफेसर, UPSIFS लखनऊ (फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी विशेषज्ञ)।
मिस्टर मेबिन विल्सन थॉमस: असिस्टेंट प्रोफेसर, जैन यूनिवर्सिटी, बैंगलोर (एआई टूल विशेषज्ञ)।
मिस्टर एन विष्णू वेंकटेश
असिस्टेंट प्रोफेसर, जैन यूनिवर्सिटी, बैंगलोर (साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ)।
ये सभी विशेषज्ञ अत्याधुनिक जांच प्रणालियों, फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी, साइबर फ्रॉड से बचाव और अपराधियों को पकड़ने में एआई के सही इस्तेमाल पर बारीकी से प्रकाश डाल रहे हैं।
### **विश्वविद्यालय के शीर्ष नेतृत्व का मिला मार्गदर्शन**
इस राष्ट्रीय आयोजन को मैट्स यूनिवर्सिटी के शीर्ष प्रबंधन का पूरा सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक (Chief Patron) यूनिवर्सिटी के चांसलर **श्री गजराज पगारिया** हैं। वहीं विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर **प्रो. (डॉ.) के.पी. यादव** बतौर संरक्षक (Patron) और डायरेक्टर जनरल **श्री प्रीयेश पगारिया** चीफ मेंटर के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा रहे हैं।
### **इन्होंने संभाली आयोजन की कमान**
वेबिनार को सफल बनाने में फॉरेंसिक साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) व संयोजक **डॉ. विचार मिश्रा**, ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी व रजिस्ट्रार **श्री गोकुलानंदा पंडा** और सह-संयोजक **मिस्टर तिलक सिंह** (असिस्टेंट प्रोफेसर, फॉरेंसिक साइंस) सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
यह आयोजन न केवल छात्रों बल्कि शोधकर्ताओं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म साबित हो रहा है, जहाँ उन्हें भविष्य की जांच तकनीकों को समझने का मौका मिल रहा है।

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